शासन विरोधी नीतियों को लेकर उमड़ा किसानों का जन सैलाब

महामहिम राष्ट्रपति के नाम किसानों ने सौंपा ज्ञापन

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पराली जलाने पर दर्ज प्रकरणों की वापसी और अन्य मांगों को लेकर किसानों का प्रदर्शन..

रेवांचल टाइम्स – मंडला, मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा किसानों के विरुद्ध लिए गए फैसले को लेकर 31 अक्टूबर देश की अखंडता और एकता के प्रतीक सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती दिवस पर जिले के हजारों किसानों ने शुक्रवार को पराली जलाने पर दर्ज प्रकरणों की वापसी की मांग को लेकर कटरा बाईपास पर जोरदार प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। किसानों ने मांग की कि सरकार किसानों पर दर्ज सभी पराली जलाने संबंधी एफआईआर और प्रकरणों को तत्काल प्रभाव से वापस ले, साथ ही अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों का शीघ्र मुआवजा भी दिया जाए। आज सुबह से ही जिले के विभिन्न विकासखंडों नारायणगंज, बिछिया, नैनपुर, घुघरी, बीजाडांडी और मवई व अन्य क्षेत्रों से ट्रैक्टरों में सवार होकर किसान मंडला की ओर रवाना हुए। प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र केवल 10 ट्रैक्टरों को ही शहर में प्रवेश की अनुमति दी गई, जबकि बाकी किसानों के ट्रैक्टरों को कटरा बाईपास पर रोक दिया गया। इससे नाराज किसानों ने वहीं पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कलेक्टर और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि किसान पहले से ही महंगाई, खेती की बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं से परेशान हैं। ऐसे में सरकार के द्वारा लिए गए हिटलरशाही फरमान जिसमें पराली जलाने पर दर्ज प्रकरण किसानों पर अन्याय है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने को अपराध बताकर किसानों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार को पराली निपटान के अन्य वैकल्पिक उपाय उपलब्ध कराने चाहिए।

किसानों ने अपने ज्ञापन में रखीं प्रमुख मांगें रखीं

पराली जलाने पर दर्ज सभी प्रकरण तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं।
अतिवृष्टि से नष्ट फसलों का सही मूल्यांकन कर किसानों को मुआवजा दिया जाए।
खाद एवं बीज की गुणवत्ता की जांच की जाए और मूल्य नियंत्रण के उपाय किए जाएं।
दलहन, तिलहन और अन्य कृषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित समस्याओं का निराकरण किया जाए। किसानों को मिलने वाले कृषि उपकरणों और सिंचाई संसाधनों पर अनुदान का लाभ किसानों को सरलता से उपलब्ध कराया जाए।इसके साथ ही असमय बारिश की मार झेल रहे किसानों को रियायत प्रदान की जाए। किसानों के द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान कटरा बाईपास पर आज लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि पुलिस ने वैकल्पिक मार्गों से यातायात को संचालित कर स्थिति को नियंत्रण में रखा। किसानों ने कहा कि पराली जलाना उनकी मजबूरी है। क्योंकि आदिवासी जिला बाहुल्य मंडला में ज्यादातर किसान छोटे और मंझोले श्रेणी में आते हैं ऐसे में छोटे छोटे काश्तकारों को आधुनिक किस्म की खेती करने और सरकार द्वारा नए नए नियम कानून लागू करने की वजह से कृषि संयंत्रों को खीरद पाना मुश्किल है। इसके साथ ही मशीनों और संसाधनों की कमी के कारण फसल कटने के बाद खेतों में बचा अवशेष हटाना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि सरकार यदि पराली निपटान के लिए उपकरणों पर सब्सिडी और उचित प्रबंधन व्यवस्था आसानी से और कम दामों पर उपलब्ध कराए,।
ज्ञापन प प्रदर्शन के दौरान किसानों ने “किसान एकता ज़िंदाबाद”, “पराली जलाना अपराध नहीं, मजबूरी है और किसानों पर मुकदमे बंद करो जैसे नारे लगाते रहे।

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