सुदेश नामदेव अखिल भारतीय परंपरागत बैध महासंघ द्वारा हुये सम्मानित

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रेवाँचल टाईम्स – मंडला, जिले के भुआ बिछिया अखिल भारतीय परंपरागत वन औषधि बैध महासंघ का आठवां अंतरराष्ट्रीय तीन दिवसीय कार्यशाला पेंड्रा छत्तीसगढ़ में आयोजित किया गया, जिसमें देश के 25 राज्यों से 600 से अधिक प्रशिक्षित बैध एवं आचार्य शामिल हुए, आठवीं राष्ट्रीय वन औषधि ज्ञान संगोष्ठी अरपा सोन पर्यावरण सुरक्षा एवं मानव विकास समिति के द्वारा आयोजित किया गया,, जिसका उद्देश्य प्रकृति को पहचाने और औषधीय पेड़ पौधों के माध्यम से अनेक रोगों से निजात पाए,
संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि विकास मरकाम अध्यक्ष औषधि पादप बोर्ड कैबिनेट मंत्री छत्तीसगढ़,, प्रोफेसर व्योम केस त्रिपाठी कुलपति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक, आरके प्रजापति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, डॉक्टर जैन पुरोहित जी विश्व प्रसिद्ध नाड़ी विशेषज्ञ गुजरात, संजय सिंह संजीवनी रस प्रायोजक एवं प्रणेता, डॉ विनोद दुबले प्राकृतिक चिकित्सा और प्रशिक्षक, की उपस्थिति में संपन्न हुआ,
परंपरागत वेद एवं प्रशिक्षित वेदों द्वारा औषधि पौधों का प्रदर्शन कर उक्त पौधों से उपचार की जानकारी दी गई,
भुआ बिछिया मंडला निवासी बैध सुदेश नामदेव द्वारा महिलाओं एवं पुरुषों के गुप्त रोगों के विषय में, सफेद पानी का निकलना, खुजलाहट होना, महीने का आगे पीछे होना, बच्चेदानी के अंदर गठानों का होना, गर्भधारण करने में दिक्कत होना आदि उक्त रोगों के होने के कारण की व्याख्या करते हुए औषधि पौधों से इसका सरल सहज उपचार बताया, उक्त जटिल रोग का सहज उपचार कार्य हेतु वेद महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल पटेल एवं मध्य प्रदेश के अध्यक्ष निर्मल रघु जी द्वारा सुदेश नामदेव को सम्मानित किया गया,, उल्लेखनीय है कि सुदेश नाम के द्वारा अनेक प्रकार की औषधि पौधों का रोपण कर, अनेक वर्षों से जड़ी बूटियां प्रदान कर लोगों का उपचार प्रदान कर रहे है,

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