कहाँ है क़ानून सरेआम हो रहे है कत्ल…. युवक ने बीच सड़क में प्रमिका का गला रेत कर की हत्या गला रेतते, लोग बना रहे है वीडियो….
रेवांचल टाईम्स – बालाघाट, के बैहर में एक हिर्दय विदारक घटना बीच सड़क में युवक ने अंजाम दिया है जहाँ प्रेम के नाम पर खूनी खेल: सड़क पर प्रेमिका का गला रेतने वाला युवक, पुलिस की गिरफ्त में परिजनों ने शव फ्रीजर में रखकर थाने का घेराव किया..‘एनकाउंटर चाहिए’ की मांग से गूंजा बैहर, उबल पड़ा जनाक्रोश बे पटरी हो रही कानून व्यवस्था भय मुक्त हो रहे है अपराध पुलिस पर उठ रहे सवाल
बालाघाट जिले के बैहर तहसील में सोमवार की सुबह वो हुआ, जिसे सुनकर हर किसी की रूह कांप गई। सन्नाटा तोड़ती चीखें, सड़क पर गिरा खून, और लोगों की आंखों में जड़ हो चुका अविश्वास। प्रेम के नाम पर एक युवक ने अपनी प्रेमिका का गला रेत दिया… दिनदहाड़े, सड़क के बीचों बीच, लोगों के सामने।
सुबह करीब 10 बजे बैहर-मलाजखंड रोड पर जब लोग अपने रोज़मर्रा के काम पर निकल रहे थे, तभी प्रेम का यह खूनी खेल खेला गया। बताया गया कि युवक बैहर क्षेत्र के गढ़ी मोतीनाला का निवासी है और मृतका आमगांव बैहर की रहने वाली थी। दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे। लेकिन सोमवार को किसी बात पर शुरू हुई कहासुनी मिनटों में कत्ल में बदल गई।
राहगीरों के मुताबिक युवक ने जेब से चाकू निकाला, और बिना कुछ सोचे, बिना कुछ बोले, लड़की का गला रेत दिया। सड़क पर वह तड़पती रही… और पलभर में खामोश हो गई। आरोपी मौके से भाग निकला …. पीछे रह गया सिर्फ खून, और सवालों से भरा यह समाज।
थाने के सामने उबाल… शव फ्रीजर में, न्याय की ठंडी सांसें
वारदात की खबर आग की तरह फैली। कुछ ही देर में सैकड़ों लोग बैहर थाने के सामने जमा हो गए। मृतका के परिजनों ने थाने का घेराव कर दिया। उनकी आंखों में आंसू नहीं थे …. वहां सिर्फ गुस्सा था, और एक सवाल …. कब तक?
उन्होंने बेटी का शव फ्रीजर में रखकर धरना शुरू कर दिया है। मांग साफ है …. जब तक आरोपी का एनकाउंटर नहीं होगा, अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
धरना स्थल पर रोते-बिलखते परिवारजन और गुस्से से भरे स्थानीय लोग एनकाउंटर चाहिए के नारे लगा रहे हैं।
पुलिस की फाइलें खुलीं, लेकिन जनता का दर्द नहीं थमा
पुलिस अधीक्षक बालाघाट के निर्देश पर टीमें गठित कर आरोपी की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। थाना प्रभारी और अधिकारी मौके पर हैं, समझाने की कोशिश जारी है। लेकिन बैहर की गलियों में लोग सिर्फ यह कह रहे हैं ….
अगर हमारी बेटियां सड़क पर मारी जाएंगी और आरोपी भाग जाएगा, तो कानून का मतलब क्या रह जाएगा?
भीड़ का यह आक्रोश केवल एक हत्या पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर है जो देर से जागती है और जल्दी भूल जाती है।
यह प्रेम नहीं, पागलपन का समाज है
यह वारदात किसी प्रेम कहानी का अंत नहीं …. यह उस सोच की परिणति है, जहाँ प्रेम बराबरी नहीं, मालिकियत बन जाता है। जहाँ असहमति को स्वीकार करने की जगह, खून से जवाब दिया जाता है।
बैहर की सड़कों पर आज सन्नाटा नहीं, बल्कि दर्द और गुस्से का कोलाहल है।
हर आंख एक ही सवाल पूछ रही है ….
कब तक कोई बेटी सड़क पर मरेगी?
कब तक कानून तमाशबीन बना रहेगा?
यह देश का वो हिस्सा है, जहाँ लोग सिर्फ न्याय नहीं, इंसानियत की तलाश में भी सड़क पर उतर आते हैं… लेकिन शासन के पास सिर्फ बयान होते हैं, संवेदनाएं नहीं।
आज बैहर की मिट्टी खून से लाल है, और हवा में सिर्फ एक आवाज़ गूंज रही है ….
हमें सिर्फ गिरफ्तारी नहीं चाहिए, हमें न्याय चाहिए…
मुकेश श्रीवास
संपादक, रेवांचल टाइम्स