सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी का चरणबद्ध आंदोलन शुरू मुख्यमंत्री के नाम पर सौपा ज्ञापन

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रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले में कार्यरत सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी संघ द्वारा कृत्रिम गर्भाधान को लेकर दिए गए अव्यावहारिक टारगेट के विरोध में सोमवार से चरणबद्ध आंदोलन किया गया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष बीएस वर्मा ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक दिन में 10 कृत्रिम गर्भाधान का टारगेट दिया गया हैं। व्यावहारिक दृष्टि से यह असंभव है। वरिष्ठ अधिकारियों के सामने कई तर्क रखे। उन्होंने अनसुनी की। इसी कारण हमने आंदोलन का निर्णय लिया। सोमवार को भोपाल सहित सभी जिलों में सीएम के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा गया हैं। जिसमे ज्ञापन में उल्लेख किया है कि पशुपालन विभाग में कार्यरत सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (AVFO) की वैधानिक / व्यवहारिक / प्राकृतिक कठिनाईयों से गुजर रहे हैं। जिसको लेकर निम्न मांगे रखते हुए ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम मंडला कलेक्टर को सौपा गया हैं।

1 पशुपालन विभाग में कृत्रिम गर्भाधान कार्य नस्ल सुधार के उदेश्य से एक जनहितेशी सुविधा उपलब्ध करवाई गई जिसका लाभ लेकर पशुपालक उन्नत नस्ल के पशु प्राप्त कर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कर अपनी आमदनी में वृद्धि कर सकता है।

2 महोदय विभाग की यह सुविधा पूर्णतः पशुपालक के लिए स्वेच्छिक है न की बंधनकारी।

3 विभाग का मैदानी अमला कृत्रिम गर्भाधान कार्य के लिए हर समय उपलब्ध है यदि कोई उक्त सुविधा पशुपालको को देने में लापरवाही बरतता है या अपने कर्तव्य स्थल से निर्धारित समय में अनुपस्थित पाया जाता है तो वह दंड का पात्र होगा।

4 महोदय कृत्रिम गर्भाधान के लिए तीन आवश्यक कारक पूर्ण होने चाहिये।

अ) मादा पशु का Heat (ऋतुकाल) में आना।

ब) पशु चिकित्सक तक पशु को उपलब्ध होना (संस्था अथवा पशु पालक के निवास पर)

स) पशुपालक द्वारा पशु चिकित्सक को उचित समय पर (6से 18 घण्टे के मध्य) सूचना देना।
वही उपरोक्त तीनो कारक पशुचिकित्सक के नियत्रण में नहीं है। उसके बावजुद विभाग द्वारा पशुगणना के आकंडो के आधार पर (Mathematically) डाटा बना कर प्रतिदिन के अनुसार लक्ष्य निर्धारण कर एक दिवस में 20-20 कृत्रिम गर्भाधान करने का फरमान जारी किया और आदेश पालन न होने की दशा में दंडनीय अपराध घोषित कर वेतन रोकना, वेतन काटना, वार्षिक वेतनवृद्धि रोकना, निलम्बित करना आदि से दंडित किया जा रहा है।

वही माँग में महोदय आप प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ इस विषय से सहमत होगे की प्राकृतिक कार्यों में मनमाफिक उपलब्धी चाहना पूर्णतः अप्राकृतिक सोच है।
कर्मचारी अपने निर्धारित दायित्वों के लिए पशुपालक को सुलग होने के लिए ही बाध्य है। विभाग के ऐसा कोई कार्य नहीं है जिसे विभागीय कर्मचारी अपनी क्षमता या स्वेच्छा से सम्पादित कर सके।

5 महोदय यदि यह मान भी लिया जावें की किसी संस्था क्षेत्र में जिसकी सीमाए 10 से 20 किलोमीटर तक विस्तारित है, इसमें 20 मादा पशु ऋतुकाल पर हो. कृत्रिम गर्भाधान कार्य हेतु एक पशु में औसत समय 1 घण्टा खर्च होना है। फिर एक मानव के लिए यह कैसे संभव है कि 20 पशुओ में प्रति दिन कृत्रिम गर्भाधान कर सके।
6 महोदय विभाग द्वारा आदेशित E-Attendance (सार्थक) के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कर अपने संस्था पर प्रातः 9.00 बजे से सांय 4.00 बजे तक उपस्थित रहकर विभाग द्वारा निर्धारित दायित्व जैसे उपचार, औषधी वितरण, बधियाकरण, टीकाकरण सहित हितग्राही मूलक योजनाओ का कियान्वयन करना।

7 महोदय यहा यह भी अवगत होना चाहेगे की प्रदेश की भोगोलिक स्थिति अनुसार अधिकाशं पशु जिनमें वर्षभर में कम से कम 4 माह तक विभिन्न प्रकार के टीकाकरण कार्य किये जाते है। यह सेवा प्रातः 7 बजे से पशुपालक के घर जाकर की जाती है।
इस गंभीर विषय पर भी विभाग प्रमुखो द्वारा संज्ञान नही लिया गया।
अतः महोदय जी से अनुरोध है कि मानवीय पहुँच से पृथक कार्यों के लिए प्रशासनिक दबाव बनाकर आर्थिक एवं मानसिक पीडा से राहत प्रदान करेगे।
ये समस्त मांगें रखते ज्ञापन सौपा गया।

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