मंडला कृषि विभाग एक बार फिर विवादों की गूंज
किसान ने बाबू रंजीत यादव पर लगाए गंभीर आरोप कि शिकायत पर निष्पक्ष जांच की मांग की

रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिला मुख्यालय के कृषि विभाग अक्सर सुर्खियों में रहता है। कभी किसानों को समय पर समुचित जानकारी और मिलने वाली योजनाओं को लेकर तो कभी अधिकारी कर्मचारियों की कार्य प्रणाली और इन दिनों में कार्यालय में बैठे लेखापाल जो उप संचालक के बहुत करीबी जाने जा रहे है और क़रीबी होने के चलते वह अपना मूल पद भुलाकर स्वंय को उपसंचालक समझ रहे है और कार्यालय में आने जाने वाले किसान और हितग्राहियों से सही तरीके से बात न करना उन्हें योजनाओं के बारे में सही न बतलाना और बात बात कर उग्र हो जाना ये आम बात सी हो गई हैं।
वही एक किसान से लेखापाल पर गंभीर आरोप,लगाते हुए शिकायत कर दी जहाँ कभी किसानों के लिए आए बीज में अनियमितता जैसे मामले इस विभाग को विवादों से बाहर नहीं निकलने देते। किसानों का कहना है कि विभाग की लचर कार्यप्रणाली और कुछ कर्मचारियों का तानाशाही रवैया अब आम बात हो गई है। सूत्रों से जानकारी अनुसार इसी क्रम में जैदेपुर बम्हनी क्षेत्र के किसान भुवनलाल सिंगोर द्वारा लगाया गया ताज़ा आरोप एक बार फिर विभाग पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अनुदान राशि में अनियमितता का मामला
वही किसान से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम बिचुआ पंचायत जैदेपुर के सात किसानों ने हाईब्रिड (शंकर) बीज के लिए आवेदन किया था। इनमें से छह किसानों के खातों में शासन द्वारा अनुदान राशि पहुंच गई, लेकिन एक किसान बोधीलाल जंघेला के खाते में राशि नहीं आई। इसी असमानता की जांच और बिलों के मिलान के लिए किसान भुवनलाल सिंगोर और बोधीलाल जंघेला कृषि कार्यालय मंडला पहुंचे थे। वहां अन्य कर्मचारी बिलों के दस्तावेज़ मिलान का कार्य कर रहे थे।
कर्मचारी के द्वारा अभद्रता और धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाया है
किसान भुवनलाल के अनुसार जब वे कार्यालय में आवश्यक दस्तावेज़ों का मिलान कर रहे थे, तभी वहां पदस्थ लिपिक रंजीत यादव अचानक पहुंचे और उनसे उलझ पड़े। किसान का आरोप है कि रंजीत यादव ने उनसे कहा कि, “तुम आए दिन हमारे ऑफिस में बैठे रहते हो। कभी इसकी जानकारी, कभी उसकी जानकारी चाहिए होती है। क्या तुम्हें पता नहीं कि यहां के कर्मचारी मेरे अधीनस्थ हैं, जैसा मैं कहूंगा वैसा ही होगा?”
वही भुवनलाल ने बताया कि जब उन्होंने इस व्यवहार का विरोध किया, तो रंजीत यादव और अधिक आक्रामक हो गए। आरोप है कि उन्होंने न सिर्फ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, बल्कि धक्का-मुक्की भी की। किसान का कहना है कि सरकारी कार्यालय में किसानों को जानकारी प्राप्त करने से रोकना और इस प्रकार का व्यवहार करना अत्यंत अनुचित है। और सरकारी कार्यालय में शासकीय कर्मचारी के द्वारा ऐसा करना अशोभनीय है और इस कार्यालय में बैठे वरिष्ठ अधिकारी की कही न कही शह स्पस्ट नज़र आ रही हैं।
अधिकारी पर भी गंभीर आरोप
वही स्थिति तब और भी गंभीर हो गई जब किसान ने इस पूरी घटना की शिकायत कृषि अधिकारी झरिया जी से की। भुवनलाल सिंगोर का आरोप है कि तब उप संचालक ने शिकायत करने पर उल्टा उन्हें ही धमकाया गया। और झरिया जी ने मुझे धमकी दी कि ज्यादा होशियार बनने की कोशिशें न करो अपनी औकात में रहो नही तो अभी किसी महिला कर्मचारी को बुलाकर शिकायत करवा दूँगा तब समझ मे आएगा और नेता गिरी निकल जायेगी यह कहते मुझे कार्यालय से भगा दिया अब मुझे लगता है कि कही मुझे कभी भी झूठे आरोप लगाकर फंसाया जा सकता है। यह सुनकर किसान और भयभीत हो गए, क्योंकि ऐसी धमकियां किसी भी आम नागरिक को मानसिक रूप से विचलित कर सकती हैं।
किसान की पीड़ा—कलमबद्ध होकर पहुंची कलेक्टर तक
वही कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के व्यवहार से परेशान होकर किसान भुवनलाल सिंगोर ने अपनी पूरी पीड़ा को लिखित आवेदन के माध्यम से जिला कलेक्टर मंडला तक पहुंचाया है। आवेदन में उन्होंने विस्तार से बताया कि किस तरह अनुदान राशि की जानकारी लेने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसके साथ ही उन्होंने कृषि अधिकारी द्वारा कथित धमकी के संबंध में भी उल्लेख किया है।किसान ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा है कि विभाग के कुछ कर्मचारी वर्षों से तानाशाही रवैया अपनाए हुए हैं, जिसके चलते किसानों को अपने ही अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य किसानों की सहायता करना है, न कि उन्हें डराना या परेशान करना।किसान का कहना है कि मंडला कृषि विभाग में अनियमितताएँ नई बात नहीं हैं। कई बार किसान बीज, खाद, अनुदान राशि और योजनाओं की जानकारी समय पर न मिलने से परेशान होते रहे हैं। कुछ किसानों ने अनौपचारिक रूप से यह भी कहा कि विभाग में यदि किसी कर्मचारी से सवाल पूछ लिया जाए या किसी योजना की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी जाए तो कर्मचारियों द्वारा उन्हें घूरा जाता है या टाल दिया जाता है।
किसानों का आरोप है कि कुछ कर्मचारी स्वयं को सर्वशक्तिमान मानकर कार्य करते हैं और यही शक्ति का दुरुपयोग कई बार विवादों को जन्म देता है। भुवनलाल सिंगोर का मामला भी इसी प्रवृत्ति का परिणाम माना जा रहा है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
भुवनलाल सिंगोर ने जिला कलेक्टर से अनुरोध किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जब तक ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक विभाग की स्थिति में सुधार नहीं आएगा और किसान इसी तरह परेशान होते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होती है, तभी अन्य किसानों में भी यह संदेश जाएगा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए गंभीर है इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसान अपने ही सरकारी विभागों में सम्मान और सहयोग की अपेक्षा नहीं कर सकते? खेतों में मेहनत करने वाला किसान जब सरकारी कार्यालय में अपमानित होता है, तो यह सिर्फ एक किसान का अपमान नहीं बल्कि पूरी कृषि व्यवस्था पर धब्बा है। किसानों का कहना है कि अनुदान योजनाएँ सरकार द्वारा उनके लिए बनाई जाती हैं, लेकिन जानकारी पाने में भी यदि उन्हें संघर्ष करना पड़े, तो ऐसी योजनाओं का लाभ सीमित ही रह जाता है।मंडला कृषि विभाग में किसान और कर्मचारी के बीच हुए विवाद ने विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। किसान भुवनलाल सिंगोर द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इनकी गहन जांच आवश्यक है। यदि वास्तव में किसानों को धमकाया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ, तो यह केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों का हनन है। अब जिला प्रशासन इस शिकायत को किस प्रकार लेता है और क्या कार्रवाई करता है, यह आने वाला समय बताएगा।
इनका कहना है कि…
मैने शिकायत कर जांच की मांग की है कृषि विभाग के एक बाबू जो अपने आप किसी अधिकारी से कम नही समझता है किसान हो या हितग्राहियों से सीधे मुँह बात करता है और आये दिन कार्यालय में आने जाने वालो को अपमानित किया करता है ।जैसे कि हम उसकी संपत्ति मांगते है, वही डी डी साहब ने भी मुझे धमकियां देते हुए महिला से रिपोर्ट होने की बात कहकर धमकाया जा रहा हैं ।
भुवन लाल सिंगोर
ग्राम पंचायत जेतेपुर बम्हनी मंडला