नगर से लेकर पंचायत क्षेत्रों में ग़ायब हुए अलाव जारी है ठंड का कहर जिम्मेदार मोन

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रेवाँचल टाईम्स – मंडला, जिले मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र में ठंड अब सितम ढाने लगी है। सरकार शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण अंचलों तक ठंड को देखते हुए चौक चोवरो में ठंड मिटाने के लिए सार्वजनिक जगह जगह पर अलाव की व्यवस्था की जाती रही है पर वर्तमान में नगर हो या ग्रामीण अंचल हो सभी जगहों से जम्मेदारों ने इस ओर ध्यान देना बंद कर दिया है जिससे सड़को और सड़को में आवागमन करने वालो में अच्छी खासी नाराज़गी देखी जा रही हैं!
वही जानकारी के अनुसार वर्तमान में गांवों में अलाव की व्यवस्था नहीं होने से सुबह-शाम लोग ठंड से परेशान हो रहे हैं। तापमान गिरने और गलन बढ़ने से ग्राम पंचायत पंडरिया एवं खैरी में लोग गर्म कपड़ों से लिपटे रहकर किसी तरह बचने का प्रयास कर रहे हैं।

घर से बाहर निकलते ही लोगों का हाड़कंपाऊ ठंड से सामना हो रहा है। बुधवार को गलन से लोग कांपते रहे। तड़के कोहरें की चादर तनी तो ठंड में इजाफा हो गया। कोहरा का साया देख वाहन चालक लाइट जलाकर गंतव्य की तरफ बढ़ते रहे। जबकि संपन्न लोग तो गर्म कपड़ों में लिपटकर रूम हीटर व अलाव तापकर राहत महसूस कर रहे हैं। गरीबों व मजदूरों के बच्चे तेज ठंड में फटे-पुराने कपड़ों में लिपटे कंपकंपाते नजर आ रहे हैं, सूर्यास्त होते ही गलन और इतनी अधिक तेज बढ़ रही है कि लोग घरों में कैद हो रहे हैं। ठंडी हवा के थपेड़ों से लोगों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। ठंड से बचाव के लिए अलाव ही मात्र एक सहारा रह गया है, जिसकी ग्राम पंचायत पंडरिया व खैरी द्वारा व्यवस्था नहीं की गई।
नगर में अलाव जलाने के लिए कहीं भी लकडिय़ों का इंतजाम नहीं किया है। इस कारण लोग अपने स्तर पर कूड़ा-करकट बीनकर अलाव जलाकर सर्दी से बचने के जतन कर रहे हैं। इसमें लोग प्लास्टिक तक जला रहे हैं, जो पर्यावरण में जहरीला धुआं छोड़ रही है। कुछ स्थानों पर बेकार पड़े टायरों को भी जलाकर ठंड भगाई जा रही है जो बदबू के साथ पर्यावरण पर विपरीत असर डाल रहे हैं।

प्रतिवर्ष जलाए जाते हैं सरकारी अलाव

नगर में पंचायत द्वारा ठंड के जोर पकड़ते ही नगर के विभिन्न स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जाती है। इसमें मुख्य चौराहों, गरीब बस्तियों, अस्पताल, बस स्टैंड आदि स्थानों पर शासकीय अलाव जलाए जाते हैं। इससे अधिक से अधिक लोग इसका फायदा उठा सके। इस बार तापमान में अधिक गिरावट होने के बाद भी यह व्यवस्था अभी तक नहीं हो सकी है।

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