डिंडौरी कृषि विभाग में महाघोटाला
‘बीज’ के नाम पर लूट : किसानों से ठगी, फर्जी सूचियाँ और लाखों का गबन
32 महीने बाद कथन रिपोर्ट में खुली जांच की पोल — समनापुर व अमरपुर बने भ्रष्टाचार के केंद्र
डिंडौरी।जिस किसान की मेहनत से देश का पेट भरता है, अगर उसी किसान के हक का बीज “सिस्टम के दीमकों” द्वारा निगल लिया जाए, तो यह केवल घोटाला नहीं, बल्कि अन्नदाता के साथ खुली साजिश है। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिले डिंडौरी से ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

जिला मुख्यालय स्थित किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अंतर्गत समनापुर और अमरपुर विकासखंड में वर्ष 2021–22 के दौरान चना बीज वितरण के नाम पर एक संगठित घोटाला सामने आया है। यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक सिंडिकेट की तरह संचालित भ्रष्टाचार का रूप लेता नजर आ रहा है, जिसमें मैदानी अमले से लेकर उच्च अधिकारियों तक की संलिप्तता के संकेत मिले हैं।
इस पूरे प्रकरण को उजागर करने वाली शिकायत रूपभान सिंह पाराशर ने वर्ष जनवरी 2023 में की थी, लेकिन करीब 32 महीने की देरी के बाद कथन दर्ज होने पर सच्चाई सामने आई है।
समनापुर ब्लॉक : कागजों में बीज, ज़मीन पर गायब
वरिष्ठ अधिकारी का दावा
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) श्री एस.एच. अठया के अनुसार,
वर्ष 2021–22 में 1175.10 क्विंटल चना बीज प्राप्त हुआ था।
इसमें से 469.20 क्विंटल बीज ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती सकुन धुर्वे को वितरण हेतु सौंपा गया।
मैदानी अधिकारी का पलटवार…
लेकिन, श्रीमती सकुन धुर्वे ने अपने बयान में बताया कि उन्हें मात्र 255 क्विंटल (850 बोरी) बीज ही प्राप्त हुआ। सवाल यह है कि 469.20 क्विंटल भेजा गया और मिला सिर्फ 255 क्विंटल, तो
शेष 214 क्विंटल बीज आखिर कहां गायब हो गया?किसानों तक यह बीज पहुंचा ही नहीं। बल्कि, रास्ते में ही इसकी कालाबाजारी कर दी गई।
“मौखिक आदेश” की आड़ में कालाबाज़ारी
श्रीमती सकुन धुर्वे ने अपने बयान में चौंकाने वाला खुलासा किया कि यह खेल उच्च अधिकारियों के “मौखिक निर्देश” पर हुआ।
उन्होंने सुश्री अभिलाषा चौरसिया और हरिशरण अठया के नाम लेकर आरोप लगाया कि इन्हीं के निर्देश पर बीजों की अवैध बिक्री हुई।75 किलो की जगह 30 किलो — दाम 775 की जगह 900 रुपये..नियम के तहत एक किसान को 75 किलो चना बीज ₹775 कृषक अंश पर मिलना था।
लेकिन हकीकत यह थी—
केवल 30 किलो बीज दिया गया.. ₹900 की अवैध वसूली की गईयह सीधा गरीब आदिवासी किसानों से धोखाधड़ी और खुली लूट का मामला बनता है।
अमरपुर ब्लॉक : बीज मिला ही नहीं, बना दी गई फर्जी सूची..अमरपुर में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री मानसिंह परस्ते ने बयान दिया कि—उन्होंने वर्ष 2021–22 का 353.25 क्विंटल बीज प्राप्त ही नहीं किया,
लेकिन तत्कालीन उपसंचालक कृषि (DDA) श्री अश्विनी कुमार झारिया ने उन पर दबाव डालकर—ऐसे किसानों की फर्जी सूची तैयार करवाई,
!जिन्हें वास्तव में बीज दिया ही नहीं गया था।
यह प्रशासनिक कदाचार, दस्तावेज़ों में हेराफेरी और आपराधिक षड्यंत्र का स्पष्ट प्रमाण है।
₹7.59 लाख का रहस्यमयी जमावड़ा
रिकॉर्ड के अनुसार,
“टर्फा योजनांतर्गत” कृषक अंश के नाम पर
₹7,59,000 की राशि
श्री एच.एस. अठया के पास जमा कराई गई, जिसकी पावती मौजूद है। जब बीज किसानों को मिला ही नहीं, तो यह राशि किससे और किस मद में वसूली गई?यह रकम अवैध वसूली के संदेह को और गहरा करती है।
सामूहिक घोटाला या सुनियोजित षड्यंत्र?
यह स्पष्ट है कि यह कोई एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि—वरिष्ठ अधिकारी — बीज की मात्रा में हेराफेरी..मैदानी अमला — अवैध वसूली व बाजार में बिक्री जांच अधिकारी — 32 महीने की देरी व लीपापोती
सभी की मिलीभगत से चला हुआ एक पूरा सिंडिकेट है।
किसानों पर असर
इस घोटाले का सीधा प्रभाव किसानों पर पड़ा—75 किलो की जगह 30 किलो मिलने से बुवाई का रकबा घटा..उत्पादन कम हुआ, जिससे आय पर सीधा असर पड़ा..
जिन किसानों को बीज मिला ही नहीं, वे योजनाओं से पूरी तरह वंचित रह गए
प्रशासन के सामने सवाल
अब जिले व शासन के सामने गंभीर सवाल खड़े हैं
तत्कालीन DDA व सभी संलिप्त अधिकारियों पर नामजद FIR कब?
अवैध वसूली गई राशि वेतन से वसूलकर किसानों को कब लौटाई जाएगी?
क्या जिले के सभी विकासखंडों में भौतिक सत्यापन कराया जाएगा?
नारा बना मज़ाक
“जय जवान — जय किसान” का नारा अब
डिंडौरी में “जय बेईमान — जय घोटाला” बनता दिख रहा है।जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो किसान न्याय के लिए आखिर जाए कहां?
अब देखना यह है कि शासन इस सामूहिक घोटाले पर सख्ती करता है या यह मामला भी फाइलों की धूल में दबकर रह जाएगा।