हरे-भरे गार्डन में सज गई हिमाचल वूलन कपड़ों की दुकान, नगर पालिका प्रशासन के गाठड़जोड से

बच्चो के खेलने की जगह पर अतिक्रमण बिना अनुमति के

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रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले की नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी अपने निजी स्वार्थो के चलते गांधी जी के तीन बंदर बन बैठे हुए जहा पर नियम-कानूनों को ताक पर रखकर कुछ भी किया जा सकता है!
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका के अधिकारी के लचीले और सुस्त रवैया के चलते नगर में रसूखदारों का मनमाना खेल चल रहा है जहां मुख्य बस स्टैंड के पीछे कलेक्ट्रेट कॉलोनी में वर्षो पुराने पार्क की जगह जो कि नगर पालिका को देखरेख के लिए दी गई थी उस पार्क में जो दृश्य देखने को मिला, उसने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहा इन दिनों खाली मैदान और बच्चों के खेलने कूदने मनोरजन और नागरिकों के लिए हरियाली व सुकून के साथ टहलने के उद्देश्य से विकसित किया गया है पर अब नगर पालिका की कमाई का जरिया बनता नजर आ रहा है, सर्दी के मौषम में उत्तर प्रदेश से व्यापार करने आये इस पार्क में बाहर से आए हिमाचल वूलन (ऊनी) कपड़ों के व्यापारियों द्वारा अस्थायी दुकानें सजा दी गई हैं।
यह पूरा मामला नगर पालिका की देखरेख में दी गई भूमि पर अतिक्रमण और नियमों की खुलेआम अनदेखी का प्रतीक बन गया है।
सूत्रों प्राप्त जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट कॉलोनी में स्थित पार्क की जमीन नगर पालिका को देखरेख के लिए सौंपी गई थी। इस स्थान पर बच्चों के खेलने के लिए झूले, खुला मैदान, साथ ही छोटे-छोटे पेड़ और फूल-पौधे लगाए गए थे, जो क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ा रहे थे। लेकिन अब इसी हरियाली और बच्चों के खेल मैदान पर अस्थायी दुकानों लग गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्क की जमीन पर दुकानों को अनुमति देकर बच्चों के अधिकारों और पर्यावरण दोनों के साथ खिलवाड़ किया गया है।
दुकानदारों से जब बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 500 रुपये के हिसाब से दुकान लगाने की व्यवस्था की गई है। जब उनसे रसीद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि अभी किसी भी प्रकार की रसीद नहीं दी गई है और जनवरी के आखिरी में हिसाब-किताब होगा। इस जवाब ने पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है। सवाल यह उठता है कि यह राशि आखिर किसके खाते में जायगी क्या यह रकम नगर पालिका के अधिकृत खाते में जमा हो रही है या फिर किसी अधिकारी या कर्मचारी के निजी खाते में स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस अतिक्रमण के चलते पार्क में लगे छोटे पेड़, फूल-पौधे और हरियाली को नष्ट कर दिया गया है। जो स्थान पहले बच्चों की किलकारियों और लोगों की सैर का केंद्र था, वह अब व्यापार का अड्डा बन गया है। लोगों का कहना है कि बच्चों के खेलने के लिए अब कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। नगर में पहले ही खुले मैदानों और पार्कों की कमी है, ऐसे में जो थोड़ी-बहुत जगह उपलब्ध थी, उस पर भी अतिक्रमण कर दिया गया।
यह मामला केवल एक पार्क तक सीमित नहीं है। नगर पालिका के सुस्त रवैये के चलते पूरे मंडला नगर में अतिक्रमण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। पार्क, फुटपाथ और खाली पड़ी शासकीय भूमि पर बेधड़क अतिक्रमण किया जा रहा है। नगर पालिका प्रशासन केवल दिखावटी कार्रवाई करता है। जब मीडिया में अनियमितताओं, गंदगी और अतिक्रमण की खबरें प्रकाशित होती हैं, तब कुछ दिनों के लिए हरकत में आकर कागजों में खानापूर्ति कर ली जाती है। इसके बाद फिर वही पुराना ढर्रा शुरू हो जाता है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब से नगर पालिका मंडला में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पद पर श्री गजानन नफाड़े पदस्थ हुए हैं, तब से नगर में अव्यवस्था, अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण में तेजी आई है। नागरिकों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें हर बार एक ही रटा रटाया जवाब मिलता है“जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।” लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम उठता नजर नहीं आता।इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी आवाज उठाई गई है। समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष अब्दुल कय्यूम अंसारी ने दिनांक 2 दिसंबर 2025 को जिला कलेक्टर मंडला को लिखित शिकायत सौंपकर इस मामले की जांच की मांग की है। अपनी शिकायत में उन्होंने उल्लेख किया है कि पार्क के अंदर समिति की अनुमति और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के गर्म कपड़ों की दुकानें लगाने की सहमति दी गई है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों और आम नागरिकों के अधिकारों पर भी सीधा हमला है।
अब्दुल कय्यूम अंसारी ने मांग की है कि पार्क से तत्काल सभी अवैध दुकानों को हटाया जाए, क्षतिग्रस्त हरियाली को पुनः विकसित किया जाए और इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए यदि समय रहते इस प्रकार के अतिक्रमण पर सख्ती नहीं की गई, तो आने वाले समय में नगर के सभी पार्क और सार्वजनिक स्थल व्यापारिक गतिविधियों की भेंट चढ़ जाएंगे। इससे न केवल बच्चों और बुजुर्गों को नुकसान होगा, बल्कि शहर की पर्यावरणीय स्थिति भी और खराब हो जाएगी।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है। क्या वास्तव में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, हरे-भरे गार्डन में सजी ऊनी कपड़ों की दुकानें नगर पालिका की कार्यशैली और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही।
क्या कहते है जबाबदार….
आप जो बतला रहें है जिसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है और पार्क में दुकान लगाने की कोई अनुमति नहीं दी गई है !
गजानन नगफड़े
मुख्य नगर पालिका अधिकारी मंडला

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