कछवाहा समाज ट्रस्ट में लाखों का खेल!
जांच में खुला हिसाब-किताब का काला सच, पूर्व अध्यक्ष पर 18.77 लाख की वसूली का शिकंजा
दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला।कछवाहा समाज ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितताओं का ऐसा मामला सामने आया है जिसने समाज की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच समिति की रिपोर्ट में ट्रस्ट के खातों में भारी गड़बड़ी, डबल एंट्री, बिना क्रम के वाउचर, बिना रसीद वसूली और प्रस्ताव रजिस्टर से छेड़छाड़ जैसे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मामले में तत्कालीन पदाधिकारी रहे रंजीत कछवाहा से 18,77,061 रुपये की वसूली की मांग करते हुए शिकायत कलेक्टर की जनसुनवाई तक पहुंच चुकी है।
तीन बार दिए रिकॉर्ड… हर बार निकली खामियां
जांच प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों को लेकर जो तस्वीर सामने आई, वह खुद कई सवाल खड़े करती है—
पहली बार 11 अप्रैल 2025 को रफ कैश बुक थमा दी गई।
दूसरी बार 6 जुलाई 2025 को फिर वही स्थिति रही।
तीसरी बार 8 अगस्त 2025 को पन्नों में लिखी कैश बुक तो दी गई, लेकिन वाउचर बेतरतीब पाए गए।
जांच समिति को बार-बार रिकॉर्ड लौटाकर मूल दस्तावेज लाने के निर्देश देने पड़े।
रिकॉर्ड देने से इनकार, फिर दबाव में सौंपे दस्तावेज
सूत्र बताते हैं कि 2 अगस्त 2025 को लिखित में रिकॉर्ड न देने की बात कही गई, लेकिन उसी बैठक में अध्यक्ष के निर्देश के बाद दस्तावेज सौंप दिए गए। इससे पूरे मामले की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
समायोजन के बाद भी करोड़ के करीब गड़बड़ी का दावा
पूर्व पदाधिकारी के अनुरोध पर कुछ वाउचरों का समायोजन किया गया—
5,80,244 रुपये
1,43,413 रुपये
इसके बावजूद 18.77 लाख रुपये की वसूली बाकी बताई गई है।
बैंक खातों में सन्नाटा, कैश बुक में खेल
जांच में सामने आया कि—
ट्रस्ट के बैंक खातों में नाममात्र की राशि मिली
कैश बुक में डबल एंट्री
सदस्यों से राशि लेने के बावजूद रसीद नहीं
यह स्थिति ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
प्रस्ताव रजिस्टर के पन्ने उखाड़ने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप प्रस्ताव रजिस्टर को घर ले जाकर उसमें मनमाने प्रस्ताव दर्ज करने और बाद में पन्ने उखाड़कर क्रम बदलने का है। यदि यह साबित होता है तो यह सिर्फ वित्तीय नहीं बल्कि प्रशासनिक अनियमितता भी मानी जाएगी।
बिजली बिल तक नहीं भरा, मंदिर अंधेरे में डूबा
छह महीने तक बिजली बिल जमा न होने से मंदिर और मंगल भवन की बिजली कट गई थी। बाद में समाज के सदस्यों ने अपनी जेब से पैसा देकर सप्लाई बहाल कराई।
जनसुनवाई तक पहुंचा मामला, कार्रवाई का इंतजार
समाज ने पूरे प्रकरण को कलेक्टर की जनसुनवाई में रखकर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
प्रेस वार्ता पर भी उठा सवाल
कुछ पत्रकारों ने पूछा कि जब मामला प्रशासन के पास है तो प्रेस वार्ता क्यों? इस पर समाज पदाधिकारियों ने कहा—
“यह जनता के सामने सच्चाई लाने और पारदर्शिता बनाए रखने की लड़ाई है।”
अब सबसे बड़ा सवाल
क्या इस पूरे मामले में प्रशासन सख्त कदम उठाएगा?
या फिर समाज की करोड़ों की आस्था से जुड़ा यह ट्रस्ट भी जांच फाइलों में दबकर रह जाएगा?