पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल: इस बार ‘गोकाष्ठ’ से महकेगी होली, जिला प्रशासन देगा विशेष प्रोत्साहन

रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला
आगामी होली के पर्व को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक सराहनीय कदम उठाया है। ‘स्वच्छ और स्वस्थ होली’ के संकल्प के साथ, प्रशासन द्वारा इस वर्ष ‘लकड़ी नहीं – गोकाष्ठ अपनाएँ’ अभियान की शुरुआत की गई है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य होलिका दहन में पेड़ों की लकड़ी के उपयोग को कम कर गौ-वंश के गोबर से निर्मित लकड़ियों (गोकाष्ठ) को बढ़ावा देना है।
निःशुल्क पंजीयन और सम्मान की व्यवस्था
जिला प्रशासन ने इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की हैंl
आसान पंजीयन सार्वजनिक होलिका दहन आयोजित करने वाली समितियाँ अपनी ग्राम पंचायत, तहसील या नगरीय निकायों के माध्यम से निःशुल्क पंजीयन करा सकती हैं।
मुख्यमंत्री प्रशस्ति पत्र
जो समितियाँ या संगठन उत्कृष्ट रूप से गोकाष्ठ आधारित होलिका दहन का आयोजन करेंगे, उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा हस्ताक्षरित प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा।
क्यों चुनें गोकाष्ठ
विशेषज्ञों के अनुसार, गोकाष्ठ का उपयोग न केवल पेड़ों को कटने से बचाता है, बल्कि इसके दहन से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को शुद्ध करने में भी सहायक माना जाता है। प्रशासन की इस पहल से जहां एक ओर गौ-शालाओं को आर्थिक संबल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ‘ग्रीन होली’ का संदेश जन-जन तक पहुँचेगा।
कलेक्टर का संदेश “हमारा प्रयास है कि इस बार होलिका दहन की अग्नि से पर्यावरण को क्षति न पहुँचे। सभी नागरिक और समितियाँ आगे आएँ और गोकाष्ठ अपनाकर इस पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता निभाएँ।”
चलो मनाएँ पर्यावरण हितैषी होली! अधिक जानकारी और पंजीयन के लिए अपने नजदीकी निकाय कार्यालय में संपर्क करें।