मवई में फिश पार्लर के नाम पर करोड़ों का खेल! सरकारी जमीन पर अवैध कॉम्प्लेक्स — प्रभारी सरपंच व सचिव पर गिरफ्तारी-रिकवरी की तलवार

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले के वनांचल क्षेत्र मवई की ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। “फिश पार्लर” निर्माण के नाम पर सरकारी जमीन पर गुपचुप तरीके से एक निजी व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़ा किया जा रहा था। मामला उजागर होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
शिकायत के बाद मचा हड़कंप
उप सरपंच की शिकायत पर एसडीएम बिछिया ने तुरंत संज्ञान लिया और जांच के आदेश जारी किए। जब जनपद पंचायत के अधिकारी और पटवारी मौके पर पहुंचे, तो जो सामने आया वह बेहद चौंकाने वाला था।
सरकारी जमीन पर निजी कॉम्प्लेक्स
जिस भूमि पर निर्माण चल रहा था, वहां पहले प्राथमिक शाला और कांजी हाउस था। पूर्व पंचायत ने जर्जर भवन हटाने के लिए प्रस्ताव पारित कर अनुमति ली थी, लेकिन नई पंचायत के आते ही इस जमीन का दुरुपयोग शुरू हो गया।
सचिव के पास नहीं जवाब, सरपंच गायब
जांच के दौरान सचिव कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए और सवालों से बचते नजर आए। वहीं प्रभारी सरपंच कैलाश धुर्वे मौके से नदारद मिले, जिससे पूरे मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध हो गई है। लैंटर तक पहुंचा अवैध निर्माण
हैरानी की बात यह है कि बिना किसी वैध अनुमति के निर्माण कार्य लैंटर स्तर तक पहुंच गया। प्रशासन के पहुंचने के बाद ही काम को रुकवाया गया और पंचनामा तैयार किया गया।
मजदूरी के नाम पर भी घोटाले की आशंका
इस पूरे मामले में एक और बड़ा खुलासा सामने आ रहा है। जानकारी के अनुसार, परिसर निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को मजदूरी का भुगतान शासकीय मद से किया गया, जबकि फिश पार्लर के साथ-साथ जो कॉम्प्लेक्स निर्माण हो रहा था, वह निजी बताया जा रहा है। ऐसे में यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि सरकारी धन का दुरुपयोग कैसे किया गया? मजदूरी के नाम पर कितनी राशि निकाली गई, यह अब जांच का विषय बन गया है। यदि भुगतान फर्जी तरीके से किया गया है, तो यह मामला सीधे तौर पर धोखाधड़ी (धारा 420) की श्रेणी में आता है।
मिलीभगत के संकेत
स्थानीय स्तर पर यह निर्माण “पंचायत कार्य” बताकर किया जा रहा था, लेकिन मौके की स्थिति और दस्तावेजों की कमी साफ तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करती है। प्रभारी सरपंच और सचिव की भूमिका अब जांच के घेरे में है।
बड़ी कार्रवाई के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, मामले में शासकीय राशि की रिकवरी और दोषियों की गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रहा है।
जनता में आक्रोश
स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन पर इस तरह का खुला भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल:
क्या प्रशासन इस घोटाले के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचेगा?
या फिर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी?