*युवाओं की भीड़, सियासत की धड़कन,अंबेडकर जयंती पर शक्ति प्रदर्शन या चुनावी रणनीति?

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – रीठी में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर निकाली गई भव्य वाहन रैली ने जहां पूरे क्षेत्र को नीले रंग में रंग दिया, वहीं इस आयोजन ने सियासी गलियारों में नई हलचल भी पैदा कर दी है। हजारों युवाओं की मौजूदगी, हाथों में लहराते झंडे और जोश से भरी भीड़ ने यह साफ संकेत दे दिया कि यह सिर्फ सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि ताकत का बड़ा प्रदर्शन भी था।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक प्रणय पांडे की सक्रिय मौजूदगी और उनके द्वारा की गई घोषणाओं ने इस आयोजन को और भी राजनीतिक रंग दे दिया। खासतौर पर रीठी बस स्टैंड का नाम डॉ. अंबेडकर के नाम पर करने की घोषणा ने इलाके में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां समर्थक इसे सामाजिक सम्मान और ऐतिहासिक निर्णय बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे सीधा-सीधा चुनावी दांव करार दे रहा है।
स्थानीय जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी ने भाजपा के लिए आगामी चुनावों की जमीन मजबूत कर दी है। जिस तरह से युवाओं को इस आयोजन के जरिए जोड़ा गया, वह आने वाले समय में वोट बैंक में तब्दील हो सकता है। खासकर दलित और पिछड़े वर्ग के बीच यह संदेश देने की कोशिश साफ नजर आई कि सरकार उनके सम्मान और पहचान को प्राथमिकता दे रही है।
हालांकि बस स्टैंड के नामकरण को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। कुछ लोग इसे विकास से ज्यादा प्रतीकात्मक राजनीति बता रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सिर्फ नाम बदलने से क्षेत्र की मूल समस्याएं हल होंगी या यह महज चुनावी माहौल बनाने की रणनीति है?
रैली के दौरान जिस तरह से जगह-जगह पुष्पवर्षा कर युवाओं का स्वागत किया गया और कार्यक्रम के समापन पर अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण कर संदेश दिया गया, उससे यह साफ है कि आयोजन को पूरी रणनीति के तहत भव्य रूप दिया गया।
कुल मिलाकर यह आयोजन अब सिर्फ एक जयंती कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह आगामी चुनावों की भूमिका लिखता नजर आ रहा है। भीड़ ने संदेश दे दिया है कि अब मुकाबला सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि भावनाओं और पहचान की राजनीति का भी होगा।

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