मंडला जिला जेल सुधार गृह के दो प्रहरी निलंबित

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क्या जिला जेल की अब बदलेगी तस्वीर.?

अजीत पटैल की मौत के बाद कार्यवाही हुई तेज

रेवांचल टाइम्स मंडला/ जिला जेल सुधार गृह एक बार फिर सुर्खियों में है। विगत कई महीनों से यहां लगातार विवादास्पद घटनाओं के कारण यह जेल चर्चा का केंद्र बिंदु बनी हुई है। हाल ही में एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध मौत के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। और चार दिवारियो में चल रहे काले कारनामे लोगों के सामने आ रहें है,
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जब इसी क्रम में जेल मुख्यालय भोपाल द्वारा की गई जांच के आधार पर जिला जेल मंडला के दो प्रहरियों नरेंद्र परस्ते और त्रिलोकमणि शुक्ला को गंभीर आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई मुख्यालय भोपाल के पत्र क्रमांक 24807/ शिकायत /05 EOW/2025 दिनांक 31 अक्टूबर 2025 के आधार पर की गई है। जिसमें अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

कैदी की मौत के बाद जेल प्रशासन पर उठ रहे सवाल

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम बिनेका निवासी अजीत पटैल, पिता जगदीश पटैल, पिछले लगभग 14–15 महीनों से विचाराधीन बंदी के रूप में जिला जेल मंडला में निरुद्ध था। जहाँ उसकी संदिज्ञ परिस्थिति में हुई मौत पर परिजनों ने आरोप लगाया है कि कुछ दिन पहले जब वे अजीत पटैल से मुलाकात करने पहुंचे थे, तब वह बिल्कुल स्वस्थ था और उसकी तबीयत को लेकर कोई समस्या उसके द्वारा नहीं बताई गई थी। परिजनों के अनुसार 27 अक्टूबर 2025 को लगभग शाम 4 बजे, मृतक के भाई संदेश पटैल को फोन पर सूचना मिली कि अजीत पटैल की तबीयत गंभीर है और उसे मंडला जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। परंतु परिजन जब अस्पताल पहुंचे तो उन्हें जानकारी मिली कि अजीत पटैल की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। पर परिजनों को बहुत लेट जानकारी दी गई और जेल प्रशासन स्वास्थ्य अमला भी सही जानकारी परिजनों को न देकर एक दूसरे के कमिया गिनाई जा रही थी
परिजनों ने आरोप लगाया कि अजीत पटैल की तबीयत बिगड़ने की वास्तविक स्थिति जिला जेल प्रशासन के द्वारा छुपाई गई। इसके साथ ही अस्पताल ले जाने की जानकारी जिला जेल प्रशासन के द्वारा परिवार वालों को समय पर नहीं दी गई। और पूरे मामले में लापरवाही बरती गई।
परिजनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।

शिकायत में साबित हुए आर्थिक लेनदेन के आरोप

कैदी की मौत के मामले के साथ ही जेल के दो प्रहरियों पर आर्थिक अनियमितताओं के भी आरोप लगे। शिकायतकर्ता चंद्रेश कुमार सिंह द्वारा की गई शिकायत में बतलाया गया कि दोनों प्रहरियों ने जिला जेल मंडला के ठेकेदारों से अनाधिकृत रूप से पैसे का लेनदेन किया था।
जो कि जांच के दौरान यह आरोप प्रमाणित पाया गया कि दोनों प्रहरियों के व्यक्तिगत बैंक खातों में जेल ठेकेदारों द्वारा धनराशि का लेनदेन किया गया था। यह लेनदेन बिना अनुमति और नियमों के विरुद्ध था। जो कि यह कृत्य सरकारी सेवा के आचार संहिता का उल्लंघन है।
वही मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह सिविल सेवा आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3(1), (2), और (3) के अंतर्गत कदाचार की श्रेणी में आता है। जहाँ अनियमितताएँ पाए जाने पर दोनों प्रहरियों नरेंद्र परस्ते और त्रिलोकमणि शुक्ला को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय केंद्रीय जेल, जबलपुर निर्धारित किया गया है। निलंबन आदेश में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह कृत्य उनके कर्तव्यनिष्ठा में कमी को दर्शाता है।और सरकारी सेवक के लिए अनुचित व अस्वीकार्य व्यवहार की श्रेणी में आता है।

जेल प्रशासन पर उठ रहे सवाल

मंडला जिला जेल पिछले कई महीनों से लगातार विवादों में है। कई बार कैदियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, मिलने वाले दोनों समय के भोजन के साथ साथ अव्यवस्थाओं और अनुशासन से जुड़े मामलों में इस जेल का नाम पहले भी सामने आ चुका है। परंतु इस घटना के बाद एक बार फिर जिला जेल प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं।

जेल परिसर में अवैध गतिविधियों की चर्चा

कर्मचारियों द्वारा नियम विरुद्ध गतिविधियों की शिकायतें जैसी बातें सामने आ चुकी हैं। अजीत पटैल की मौत के बाद परिजनों द्वारा लगाये गए आरोपों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

पूरे प्रकरण में जांच की मांग तेज

परिजनों का कहना है कि अजीत पटैल को अस्पताल कब ले जाया गया.? उसकी तबीयत कब बिगड़ी.?
मौत अस्पताल में हुई या जेल में.?
सूचना देने में देरी क्यों की गई.?
इन सभी सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हुए हैं।
परिजन यह भी चाहते हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और जेल की अंदरूनी रिपोर्ट सभी को सार्वजनिक किया जाये। ताकि मौत की वास्तविक वजह परिवार जनों के साथ ही साथ आमजन को भी पता चल सके।

जेल विभाग की अगली कार्रवाई का इंतजार

प्रहरियों के निलंबन के बाद अब यह देखा जाना बाकी है कि क्या विभाग इस मामले में आगे और कार्रवाई करता है या नहीं।
वही परिजनों ने कहा कि एक विचाराधीन बंदी की मौत हो जाना अत्यंत गंभीर विषय है और इस पर व्यापक जांच अत्यंत आवश्यक है। परिजन यह भी चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों और जेल प्रशासन हवालातियो और कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करे। और जेल प्रशासन के द्वारा की जा रही लापरवाही पर ध्यान देते हुए ठोस कार्यवाही किए जाने की अवस्कता है!

इनका कहना है कि

प्रहरियों के नाम से गुमनाम शिकायत हुई थी उस संबंध में कार्यवाही चल रही है गुमनाम में तो कोई कार्यवाही होती नही है अभी वर्तमान समय पर जबलपुर वाले जांच कर रहे है। अजीत पटैल को अस्पताल पुलिस गार्ड ले गई थी एक बार वापस ले आई थी, हमने दोबारा भेज दिया था। मेडिकल जांच समिति बनी है उस संबंध में हमे ऐसी कोई जानकारी नही है।
संजय सहलाम
जेल अधीक्षक मंडला

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