नहर टुटने की जवाबदेही और दोषियों पर कार्यवाही हो सुनिश्चित
दैनिक रेवांचल टाईम्स – ग्राम सगङा – झपनी क्षेत्र के पास बरगी बांध की दायीं तट नहर टुटने के कारण आसपास के कई खेतों में पानी भर गया है। लगभग आधा दर्जन गांवों के किसान प्रभावित हुए हैं। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने कहा है कि बरगी नहर का बार-बार टूटना सिर्फ एक तकनीकी दुर्घटना नहीं, बल्कि नहर निर्माण में व्याप्त भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर जवाबदेही तंत्र का गंभीर संकेत है। जबकि नहर के मेंटेनेंस के लिए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से प्रतिवर्ष बजट आवंटित किया जाता है।बरगी दायीं तट नहर का निर्माण जिन मानकों पर होना था, वे अधिकांश स्थानों पर सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गया। नहर की लाइनिंग में घटिया सीमेंट, कम मोटाई के स्लैब और कमजोर तटबंध बनाए गए। जहां मिट्टी की प्रकृति और जल दबाव के अनुसार विशेष तकनीकी संरचना जरूरी थी, वहां लागत बचाने के नाम पर समझौता किया गया। नतीजा यह हुआ कि नहर पानी का दबाव झेल ही नहीं पाई और टूट गई।नहर टूटने से पहले भी कई हिस्सों में रिसाव और धंसाव की शिकायतें थीं। मरम्मत के नाम पर लाखों के भुगतान हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर काम बहुत ही कम हुआ। बरगी नहर परियोजना में सबसे कम बोली प्रणाली के चलते ठेकेदारों ने अव्यवहारिक रूप से कम दरों पर काम लिया। बाद में लागत निकालने के लिए गुणवत्ता से समझौता किया गया।
ज्ञात हो कि दायीं तट मुख्य नहर को बरगी व्यपर्तन प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाता है। इसकी लंबाई लगभग 197.4 किमी, 254.14 किमी शाखा नहर, 2700 किमी वितरण नेटवर्क और 3625 संरचनाएं शामिल हैं।इस बरगी व्यपर्तन प्रोजेक्ट की शुरूआती लागत 1101.23 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5127.22 करोड़ रुपए हो गया है। बरगी बांध 1990 में बनकर तैयार हो गया था। परन्तु 36 साल बाद भी सतना और रीवा के 885 गांव में सिंचाई के लिए एक बूंद पानी नहीं पहुंच पाया है। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ मांग करता है कि स्वतंत्र और सार्वजनिक जांच हो,दोषी ठेकेदारों व अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई हो, पारदर्शी ठेकेदारी व्यवस्था लागू की जाए और
सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य बनाया जाए।
क्योंकि जब नहर नहीं, व्यवस्था ही सड़ चुकी हो, तो मरम्मत से नहीं, जवाबदेही से ही समाधान निकलेगा।
राज कुमार सिन्हा (9424385139)
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ