शासन से स्वीकृत तालाब बना “खनिज खेल” का जरिया, कृषकों के साथ धोखाधड़ी – क्रेशर संचालक मालामाल


शासन से स्वीकृत तालाब बना “खनिज खेल” का जरिया, कृषकों के साथ धोखाधड़ी – क्रेशर संचालक मालामाल
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला जिले के भुआ बिछिया और घुघरी क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ शासन द्वारा स्वीकृत “खेत तालाब” और तालाब योजनाएं जो कि गुडली, कोको हर्रा भाट में अब अवैध खनन का माध्यम बनती जा रही है। आरोप है कि क्रेशर संचालक खनिज विभाग से गठजोड़ कर भोले-भाले कृषकों को झांसे में लेकर करोड़ों के पत्थर का अवैध उत्खनन कर रहे हैं।
कैसे हो रहा है पूरा खेल?
सूत्रों के अनुसार, क्रेशर संचालकों को जिस भूमि पर खनन की लीज मिली है, और सूत्रो की माने तो अधिकांश क्रेशर संचालकों के पास तो लीज भी नही है और अगर है भी तो उसकी अवधि समाप्त हो चुकी हैं इसके बावजूद पत्थर निकाले जा रहे हैं वहाँ खुदाई करने के बजाय वे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बंजर जमीन बेजान पड़ी भूमि को तलाशते हैं। इसके बाद किसानों को यह कहकर प्रलोभन दिया जाता है कि—
“हम आपकी भूमि, खेत में शासन योजना के तहत तालाब बनवा देंगे, पूरा खर्च हमारा होगा…”
लेकिन असली खेल यहीं से शुरू होता है।
तालाब खुदाई के नाम पर भारी मात्रा में पत्थर निकाला जाता है, जिसे सीधे क्रेशर में उपयोग कर लिया जाता है। न तो इस पत्थर का कोई रिकॉर्ड रखा जाता है और न ही शासन को इसका राजस्व मिलता है।
अनुमति तालाब की, काम खदान जैसा
तालाब निर्माण की अनुमति लेकर तक गहरी खुदाई
पर्यावरण पर संकट का असर
ग्रामीणों ने बताया कि:
पहले कभी कोई समस्या नहीं थी
पहले प्राकृतिक संपदा और प्रदुषण का नही था पर अब संकट शुरू हो राह है और पहले वनों में हरे-भरे पेड़ थे, अब क्रेशर की धूल से सब खत्म और आने दिनों में प्रकृति के साथ साथ खुला छेड़ छाड़ किया जा रहा हैं।
वही यह साफ संकेत है कि अनियंत्रित खनन ने पूरे पर्यावरण तंत्र को प्रभावित किया है।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
पंचायत कोको हर्राभाट-गुडली (तहसील भुआ बिछिया) में आरोप है कि: क्रेशर संचालक केवल अनुविभागीय अधिकारी की अनुमति लेकर लाखों घन मीटर उत्खनन जरूरी पर्यावरण और खनिज अनुमतियाँ नहीं ली गईं
पूर्व में की गई शिकायतों को दबाव बनाकर वापस करवाया गया
राजस्व को करोड़ों का नुकसान
बिना रिकॉर्ड के निकाले जा रहे पत्थरों से शासन को भारी राजस्व हानि हो रही है।
यह मामला सिर्फ किसानों के शोषण का नहीं, बल्कि सरकारी खजाने की खुली लूट का भी है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
सभी बबलू राय, मुकेश राय, पुष्पेन्द्र ठाकुर, प्रकाश साहू क्रेशर एंव घुघरी के आशीष अगवाल रामप्रसाद साहू जैसे अनेकों अवैध क्रेशरों की लीज न होने के बावजूद क्रेशर संचालन किये जा रहे है और पास के कृषको से खेत खलिहान लेकर उससे पत्थर निकाल रहें है गिट्टी पत्थर की सघन जांच हो जिससे शासन को हुए राजस्व का नुकसान की भरपाई हो सके और अबैध खनन करने वाले इन माफियाओं पर एक ठोस कदम हो सके और शासन प्रशासन के साथ साथ कृषकों के साथ कि जा रही धोखाधड़ी न हो सकें।
तालाब के नाम पर हो रहे उत्खनन पर तुरंत रोक लगे बिना अनुमति के किये जा रही ब्लास्टिंग पर प्रतिबंध लगाया जाए
सबसे बड़ा सवाल
क्या “खेत तालाब योजना” अब अवैध खनन का लाइसेंस बन गई है?
क्या खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है?
और कब तक भोले-भाले किसान इस धोखाधड़ी का शिकार होते रहेंगे?