एम.पी अजब है एम.पी गज़ब हैं मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में मिला भारत का अनोखा गरीब आदमी..
दैनिक रेवांचल टाइम्स सिवनी/ मध्य प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक प्रचार अभियान का नारा लाया था जिसे मध्य प्रदेश के पर्यटन विभाग ने वर्ष 2010 में जारी किया था वो लाइनें हैं एम पी अजब है एम पी गजब हैं जी हां ऐसे ही नारों को अब मध्य प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग के द्वारा चरितार्थ किया जा रहा हैं जिसमें धरातली स्तर पर ये लाइनें और नारा हकीकत में देखने और सुनने को मिल रहा हैं। मध्य प्रदेश राजस्व विभाग का सिवनी जिला और इस जिले के अंतर्गत लखनादौन तहसील की उपतहसील धूमा में भूत पूर्व नायब तहसीलदार ललित ग्वालवंशी के द्वारा अजब गजब का कारनामा करते हुए आय प्रमाण पत्र जारी किया गया। जिसमें सुनील कुमार झरिया पिता खेमसिंह झरिया निवासी पाठादेवरी की सालाना आय कुल (3600) ₹ तीन हजार छह सौ रुपए का जारी किया गया। अब सवाल यह बनता हैं कि ऐसे लापरवाह अधिकारियों के द्वारा जारी आय प्रमाण पत्रों ने सरकारी सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिससे कि यह जांच का विषय बनता हैं कही ऐसा तो नहीं इनके कार्यकाल में अन्य और व्यक्तियों के आय प्रमाण पत्र के साथ साथ जाति या अन्य दस्तावेजों में गलतियां की गई हो और वास्तव में जिसका लाभ जिसको मिलना चाहिए उसको न मिल कर अन्य किसी और को आर्थिक या अन्य लाभ पहुंचाया गया हो।
मध्य प्रदेश वाकई अजब है और यहां के सरकारी दफ्तरों के कारनामे गजब हैं. और यदि सिवनी जिले की बात करें तो पूरे प्रदेश में सिवनी के कारनामे किसी से छिपे नहीं है। सिवनी की ही केवलारी तहसील में 11 करोड़ से अधिक की सरकारी राशि का घोटाला सामने आया था। वही ताजा मामला सिवनी जिले से ही सामने आया है, जहां की लखनादौन तहसील से जारी आय प्रमाण पत्र ने सभी को हैरान कर दिया. वृत्त धूमा तहसील से सुनील नाम के व्यक्ति को जारी आय प्रमाण पत्र में उनकी वार्षिक आय महज 3600 रुपये दर्शाई गई। और यदि सूक्ष्मता से जांच की जाए तो ऐसे कई आय प्रमाण पत्र सामने आएंगे।
यह कारनामा तात्कालीन सहायक भू अभिलेख अधीक्षक ललित ग्वालबंसी के द्वारा तहसील लखनादौन की धूमा वृत्त में नायब तहसीलदार पद पर की गई पदस्थापना के दौरान किया गया है।
जानकारी यह भी है कि संबंधित अधिकारी अपने पद का कुछ ज्यादा ही इस्तेमाल करते हैं। सिवनी जिले की बंडोल उप तहसील में उनके कार्यकाल के दौरान इन्होंने बिना आदेश के किसी संस्था की निजी बाउंड्री बाल तुड़वा डाली थी। और बाद में जब यह मामला माहौल गर्माया और सक्षम अधिकारियों तक यह बात पहुंची तो बाद में नायब तहसीलदार ग्वालवंशी के द्वारा स्वयं के पैसों से दीवाल खड़ी करवानी पड़ी थी। सूत्रों से मिली जानकारीनुसार यह भी हैं की संबंधित अधिकारी सरकार की नौकरी में कम और निजी संस्थान नाम की किसी अन्य कंपनी में ज्यादा समय देते हैं । और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को अपने अधिकारी होने का रोब दिखाकर उक्त कंपनी पर सदस्यता लेने मजबूर कर देते हैं। और 7800 ₹ की जॉइनिंग राशि के साथ अपने अधिनस्थ अन्य शासकीय कर्मचारियों को भी इस कंपनी का सदस्य बना देते हैं। साथ ही सूत्रों ने यह भी आरोप लगाते हुए बतलाया कि उक्त राशि का आहरण सक्षम अधिकारी के द्वारा स्वयं ही अपने खाते में भी ले लेते हैं। इसके साथ ही छोटे मोटे कर्मचारियों की क्या मजाल जो की सक्षम अधिकारी का विरोध दर्ज करवा सकें। यदि धोखे से भी निचले कर्मचारियों के द्वारा विरोध दर्शाया जाता हैं तो उस कर्मचारियों के खिलाफ उच्च अधिकारियों को मिथ्या पूर्वक कारण के प्रस्ताव प्रेषित कर कार्रवाई करवा दी जाती है।
वही जानकारीनुसार पता चला हैं की सिवनी जिले के बंडोल में ऐसे कई कर्मचारी हैं जो भय वश सक्षम अधिकारी के कहने पर निजी कंपनी के नाम की सदस्यता ली है। वही शासन की गाइड लाइन के अनुसार नियमावली यह भी कहती हैं कि अगर शासन प्रशासन से बिना अनुमति के क्या कोई अधिकारी कर्मचारी किसी प्राइवेट कंपनी पर कार्य कर करता हैं तो उस पर कदाचरण का मामला पंजीबद्ध कर सजा का प्रावधान भी है। लेकिन वहीं सक्षम अधिकारी के द्वारा खुलेआम शासकीय दफ्तर पर बैठकर प्राइवेट कंपनियों की गूगल मीटिंग अटेंड करना और अधीनस्थ कर्मचारियों को सदस्य बनाना इनका दायित्व सा बन गया है। फिलहाल उक्त अधिकारी जबलपुर जिला कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ हैं।
वही जब दैनिक रेवांचल टाइम्स के विशेष पत्रकार के द्वारा सक्षम अधिकारी से जब उनका पक्ष जाना गया तो उनका कहना था कि..
मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं हैं आपके द्वारा मुझे अवगत करवाया गया हे मै इसकी जांच करवा लूंगा कभी कभी मानवीय त्रुटि वश ऐसा हो जाता हैं।
नायब तहसीलदार भू अभिलेख कार्यालय जबलपुर
ललित ग्वालवंशी
अब सवाल यह बनता हैं कि जब सक्षम अधिकारी संबंधित जिले में पदस्थ ही नहीं हैं तो फिर जांच कैसे करवाएंगे।।
आपके द्वारा मुझे जो जानकारी मिल रही हैं वो भू राजस्व की धारा के अंतर्गत नियम विरुद्ध हैं। नियम पूर्वक पहले सक्षम अधिकारी को पटवारी प्रतिवेदन की जांच की जानी चाहिए थी उसके बाद में ऐसे कोई प्रमाण पत्र जारी किया जाना था, फिर भी मैं देखता हु इस मामले को।
रवि कुमार सिहाग (आई.ए.एस)
एस डी एम लखनादौन वृत्त