सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता का तानाशाही रवैया

वर्तमान मंडला सहायक आयुक्त पुराने सहायक आयुक्त के नक्शे कदम पर जारी है भ्रष्टाचार
दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला/मंडला आदिवासी बाहुल्य जिला के अधिकारी और क्या कर्मचारी यहां की आवो हवा ही कुछ ऐसी है कि मंडला जिले के ऑफिसों में आकर बैठते ही अधिकारी और कर्मचारी पद का दुरुपयोग कर अपना तानाशाही रवैया अपनाने में लगे हुए हैं। और खुल के योजनाओं में खुल कर भ्रष्टाचार ग़बन करने की ये प्रथा तत्कालीन सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला से लेकर चली आ रही है कभी शिक्षा व्यवस्था में समान ख़रीदी के नाम पर तो कभी भवनों के मरम्मत के नाम पर तो कभी अटैचमेंट संलग्नीकरण बड़े अधिकारी अपने अधिनस्थ कर्मचारियों को और अधीनस्थ कर्मचारी अपने एरिया के आमजन को परेशान करने से कभी पीछे नहीं हटते। शायद तभी तो मंडला जिले का ऐसा कोई विभाग होगा जो अपने हिटलरशाही और तानाशाही रवैयों के लिए जाना न जाता हो। ऐसे ही कारनामें और रवैये अभी वर्तमान समय पर आदिवासी जनजाति कार्य विकास की सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता ने अपना रखा हैं। सहायक आयुक्त मंडला इन दिनों जम के नवनिर्माण भवन कार्यो की धांधली में ठेकेदारों से साठगांठ करने और जेब भरो अभियान के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

घटिया भवन बनाकर ठेकेदारो और अपने अधीनस्थों से बच्चो के मौत का सौदा…
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सहायक आयुक्त मंडला के द्वारा इन दिनों काफी सुर्खियों में नजर आ रही है जहाँ पहले ही शिक्षकों के स्थानंतरण के नाम पर जम कर वसूली कार्यालय में चला और उसकी चर्चा शांत भी नही की इन दिनों सहायक आयुक कार्यालय से स्वीकृत बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा व्यवस्था के लिए लाखों करोडो के भवन सरकार ने स्वीकृत की जहाँ विभाग पर घटिया निर्माण कार्य ठेकेदारों के द्वारा किया जा रहा जो बनने से पहले ही बीम कलम गिर रहे है जिसकी स्थानीय ग्रामीणों ने शिकायत की जिसकी जाँच कब हुई कैसे हुई जाँच में क्या पाया और ठेकेदार पर कोई कार्यवाही हुई या केवल सेवा शुल्क लेकर मामले को रफा दफा कर दिया गया वही बीजाडांडी के विजयपुर में बन रहे भवन में स्थानीय ग्रामीणों ने जो शिक़वा शिकायत की थी जिसकी जाँच में मंडला से सहायक आयुक्त और विभाग के एस डी ओ श्री गुप्ता जो मोके में पहुँचे और नवनिर्मित भवन का रुका हुए कार्य पुनः चालू कर करा दिया गया जिसको लेकर स्थानीय ग्रामीण और जागरूक नागरिक ठेकेदार और सहायक आयुक्त कार्यालय से मौके में पहुँची टीम पर मिलीभगत और ठेकेदार से सांठगांठ करने और तरह तरह के आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की बात कर रहे है कहा जा रहा है कि विभाग बच्चों के भविष्य के खिलवाड़ कर रहा और ठेकेदार से मिल कर अपनी झोली भर कर भवन में भर्राशाही रवैया अपनाते हुए रुपया बटोरो अभियान के तहत सहायक आयुक मैडम अपने पदीय दायित्वों को दरकिनार किया जा रहा है जो तत्कालीन सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला की राह पर चल पड़ी हैं। यदि तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो संतोष शुक्ला के बाद में सहायक आयुक्त की कुर्सी विजय तेकाम ने संभाला जो उनके द्वारा भी अपने गुरु और भ्रष्टाचार के महागुरु के नक्शे कदम में चले और स्कूल भवन छात्रावासों में मरम्मत के नाम पर जम कर भ्रष्टाचार किया गया जिन भवनों में मरम्मत कार्य की आवश्कता थी उन भवनों एक रुपये का कार्य नही हो आज भी बच्चें खुली छत के नीचे ओर जर्जर भवन में बैठ रहें है और उन भवनों का लाखो करोड़ों रुपये का मरम्मत कार्य किया गया जहाँ पहले से ही दुरुस्त थे पर सरकारी राशि मे कैसे भ्रष्टाचार करे क्योंकि उनके गुरु सन्तोष शुक्ला ने शिखाया है कि इस जिले में मुख बधिर लोग निवास करते है और इन्हें किसी से कोई मतलब नही और न ही इन्हें सरकारी योजनाएं की आवश्कता है जिले के बड़े बड़े भवन जैसे ग़ायब हो चुके है पर किसी जनप्रतिनिधियों ने या फिर जिला प्रशासन में बैठें कलेक्टर जैसे भी सन्तोष शुक्ला की मिली शिकायत में जाँच करने से पीछे नज़र आये और मामा भांजे ने जम को इस जिले की शिक्षा व्यवस्था का दोहन किया उसी तर्ज में वर्तमान सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता मैडम भी कार्य करते नजर आ रही हैं । अभी भी भ्रष्टाचार और सरकारी पैसों के गबन के मामले में संतोष शुक्ला का स्थान में पहले नम्बर पर ही बना हुआ हैं। क्योंकि शुक्ला ने मध्यप्रदेश के झाबुआ मंडला डिंडौरी के बाद खंडवा जैसे जिलों में रुपया बटोरो अभियान के तहत मध्यप्रदेश में अपना नाम रोशन कर रहे है। तो वही अब वर्तमान सहायक आयुक्त भी इन्ही के नक्शे कदम और ताल से ताल मिला कर चलने में पीछे नजर नही आ रही हैं जानकारी के अनुसार सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता मंडला ने भी भ्रष्टाचार ग़बन अभियान को बढ़ावा देते हुए धमाकेदार इंट्री कर ली हैं।
रुपयों के लिए खूखार हुई सहायक आयुक्त
वही जानकारो की माने तो एक कहावत हैं कि आदम खोर शेर कभी भी शिकार कर सकता है उसको न तो किसी का डर होता हैं और न ही भय क्योंकि वह आदमखोर होता हैं जो सभ्य सामाज के लिए हमेशा ही नुकसान दायक होता हैं। इसी तरह बिना भयमुक्त रुपयों कि भूख से ग्रसित सहायक आयुक्त रुपयों का शिकार करने में आमादा हैं। सूत्र बतलाते हैं कि वर्तमान सहायक आयुक्त के द्वारा शासन के दिशा-निर्देशों को अपने पैर कि जूती समझते हुए अपने ही विभाग में लूट खसौट का माध्यम बना लिया है ! जिसके तहत संलग्नीकरण/स्थानांतरण आदेश बिगैर सक्षम अधिकारीयों के अनुमोदन के सहायक आयुक्त ने अपनी तिजोरी भरने के साथ साथ शिक्षकों को मन चाहे स्कूल में संग्लन किया गया। और वर्तमान में भी न्योछावर भेंट चढ़ौत्री के आधार पर मनचाही जगहों पर पदस्थ करने को आमादा हैं। जिले में ऐसे भी दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में सरकारी स्कूल संचलित है जहाँ पर एक शिक्षक है या फिर अथिति शिक्षकों के भरोसे से बच्चों का भविष्य सवारा जा रहा है और मुख्यालय और मुख्यालय से लगे स्कूलों में शिक्षकों की भरमार देखी जा सकती है और कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जहाँ बच्चे कम है और शिक्षक अधिक
सहयक आयुक्त के द्वारा डरवा कर पैसा बटोरो अभियान किया गया जारी…
सूत्र बताते है कि सहायक आयुक्त की नई नई कुर्सी पाते ही मैडम जी ने तीन संतान वाले अधिकारी कर्मचारी को पत्र जारी कर पहले तो खौफ दिखाया गया और बाद में ऐसे कर्मचारी जो इसके दायरे में आते थे उनसे नज़राना अभियान के तहत छूट दे दी गई।जिससे यह सिद्ध होता हैं कि नज़राना अभियान इनके द्वारा सर्वोपरि था तभी तो आज तक तीन संतान वाले ऐसे कर्मचारी जिनके ऊपर सरकारी नियमों के उल्लंघन के तहत कार्यवाही की जानी थी वो वर्तमान सहायक आयुक्त के द्वारा नहीं की गई। और न ही उनके नुमांइदों के द्वारा अधिकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई और न ही आज तक कोई वैधानिक कार्यवाही की गई। तो क्या फिर इनके द्वारा क्या सिर्फ मानसिक रूप से परेशान कर नई नवेली दुल्हन कि तरह नज़राना पेश कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। तो वहीं सूत्रों का कहना है यदि तीन संतान वाले मामले में विभाग के द्वारा निष्पक्ष जाँच हो जाए तो ऐसे बहुत से शिक्षक नियम विरुद्ध काम करते हुए पाये जाएंगे। तो अब सवाल उठता हैं कि क्या सहायक आयुक्त मैडम के द्वारा अपने ही आदेश को ठेंगा दिखाते हुए पूर्व आयुक्त की तरह नज़राना अभियान को अपनाने में कोई कोताही नहीं बरती गई।
कहीं आदिवासी बच्चों के खून से रंग न जाये विभाग…
बीजाडांडी अंतर्गत ग्राम विजयपुर में वर्तमान समय पर निर्माणधीन छात्रावास का काम चल रहा हैं जिसमें अभी कुछ दिन पहले ही देखने को मिला था कि हवा के झोंके में ही प्लंथ जमींदोज हो गई थी जिसकी तस्वीर चीख चीख ठेकेदार कि पोल खोल बता रही थी कि ठेकेदार के द्वारा काम को कितनी ईमानदारी के साथ में किया जा रहा हैं। और सरकार के खजाने को कैसे जमकर खाली किया जा रहा हैं। जिसकी चर्चा अभी भी मंडला जिले वासियों की जुबान पर हैं। जिसकी जांच करने गत दिनों आयुक्त एवं एडीओ भी मौके पहुंचे हुए थे। जिसमें जांच को किसी फिल्म कि तरह सूटिंग की गई और जांच को ऐसा दिखाया गया कि जैसे घटनास्थल पर कुछ हुआ ही नहीं।मामले को जांच के नाम पर खानापूर्ति कर ठेकेदार को अभय वरदान देते हुए पुनः कार्य करवाने की अनुमति दे दी गई। तो वहीं उपयंत्री तिवारी के द्वारा गांव वालों के विरोध के बाद में भी ठेकदार को खुली छूट दे कर कार्य को दोबारा शुरू करवा दिया गया फिर मंडला सहायक आयुक्त के द्वारा भी यही किया। तभी तो गांव वाले खुले तौर पर सहायक आयुक्त और और उपयंत्री को बोलने से पीछे नहीं हट रहे हैं कि नज़राना अभियान से कोई भी पीछे हटते हुए नज़र नहीं आए रहें हैं। नियमावली के तहत तीन संतान वाले ऐसे शिक्षक जो नियम विरुद्ध कार्यरत हैं इसके बाद ठेकेदार द्वारा सहायक आयुक्त के खजाने में चार चाँद लगाने में अहम रोल निभा रहा हैं। जिसकी जन चर्चा आमजन में भी जमकर है कि मेम साहिबा का नज़राना अभियान जिला भर में तारो की रौशनी की तरह गुले-गुलजार है। पूरे मामले से यह स्पष्ट है और चर्चा भी है की कही ठेकेदार के साथ विभागीय अधिकारियों की भोले भाले आदिवासी बच्चो की मौत का सौदा तो नहीं हो गया। तो वही ग्रामीण जन आरोप लगाते हुए अंदेशा व्यक्त कर रहे हैं कि आने वाले संयम में कही ऐसा तो न हो कि आदिवासी बच्चो के खून से विभाग रंगा हुआ पाया जाये। क्योंकि विभाग जिस तरह से पाने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी निभाता नजर आ रहा है वह दिन दूर नही है।
इनका कहना है!
ठेकेदार के द्वारा ये कैसा भवन बनाया जा रहा जो अभी बनते बनते ही कलाम टूट रहे है और कलाम की जो मसाला लगाया गया जिसकी गिट्टी और रेत हाथों से करोचने से निकल रही है तो अनुमान लगाया जा सकता है कि कितना गुणवत्ता का ध्यान रखा गया है और भवन कितनी मजबूती से बनाया जा रहा है सरकारी भवन है ठेकेदार और विभाग तो जैसे तैसे भवन बनाकर तैयार कर देंगे पर पढ़ने हमारे बच्चे जाएगे अभी हाल में ही राजेस्थान में स्कूल की छत गिरने से कितने बच्चे समय से पहले ही मौत को गले लगा लिए हम हमारे गाँव मे ऐसा नही होने देंगे ठेकेदार की जाँच के लिए गाँव वालों ने आवेदन दिया है जाँच की मांग की है अगर जाच नही होती है तो हम सभी लोग भवन नही बनने देंगे।
भोलाराम मरावी
स्थानीय ग्रामीण विजयपुर बीजाडांडी मंडला