अधूरी चिट्ठी: बेटे की बेरुख़ी और बाप का आख़िरी इंतज़ार
लेखिका- सुनीता कुमारी
पूर्णियां बिहार
रेवाँचल टाईम्स - गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे एक टूटी-फूटी लकड़ी की चारपाई पड़ी रहती थी। उसी पर रामनाथ बैठा रहता था।उसकी उम्र लगभग लगभग सत्तर बरस थी। चेहरे पर झुर्रियां भरी हुई थी,…