मंडला–डिंडौरी मार्ग बना ‘धूल का तूफान’, नागरिकों का घुट रहा है दम

492 करोड़ की सड़क योजना में लापरवाही, 6 माह से उखड़ी सड़क पर नहीं हुआ निर्माण

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रेवांचल टाईम्स | मंडला, मध्य प्रदेश के मंडला जिले में सड़कों की बदहाली अब प्रशासनिक उदासीनता का खुला प्रमाण बन चुकी है। जिले की अधिकांश सड़कें खस्ताहाल हैं, लेकिन सबसे भयावह स्थिति मंडला–डिंडौरी मार्ग की है, जहाँ उड़ते धूल के गुब्बारों ने नागरिकों का चलना-फिरना तक दूभर कर दिया है।
मंडला से आमनाला, आईटीआई और रामनगर तक का मार्ग करीब छह माह पहले ठेका कंपनी द्वारा उखाड़ दिया गया, लेकिन उसके बाद से सड़क निर्माण कार्य लगभग ठप पड़ा है। पहले से बेहतर हालत में रही डामरीकृत सड़क को खोदकर छोड़ दिया गया, जिसके कारण जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं। परिणामस्वरूप यह मार्ग अब दुर्घटनाओं का गढ़ बन गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उखाड़ी गई डामर और गिट्टी को पटपरा स्थित प्लांट में डंप तो कर दिया गया, लेकिन नई सड़क बिछाने की कोई शुरुआत नहीं की गई। भारी वाहनों की आवाजाही से इतनी धूल उड़ रही है कि आसपास के घर, दुकानें और कपड़े धूल से पट गए हैं। हालात ऐसे हैं कि राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को रास्ता तक नजर नहीं आता, वहीं बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है।
जानकारी के अनुसार डिंडौरी से मंडला तक लगभग 492 करोड़ रुपये की लागत से टू-लेन पेव्ड शोल्डर सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। मोहगांव तक कार्य पूर्ण होने के बाद आमनाला, रसैयादौना सहित अन्य हिस्सों में काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जो सफर पहले 30 मिनट में पूरा हो जाता था, अब उसे तय करने में एक घंटे से अधिक समय लग रहा है।
सड़क निर्माण के साथ-साथ पुल और कल्वर्ट भी अधूरे छोड़ दिए गए हैं। बरसात में बनाए गए डायवर्जन कई बार बह चुके हैं, जिससे जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनती रही। सुरक्षा संकेतक, बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्डों का पूर्ण अभाव दुर्घटनाओं के खतरे को और बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ठेका कंपनी मनमानी कर रही है, जबकि जिला प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। अब तक न तो निर्माण की गति बढ़ी और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने आई।
नागरिकों की स्पष्ट मांग है कि मंडला–डिंडौरी मार्ग के निर्माण की विशेष जांच कराई जाए। साथ ही मंडला जिले में पूर्व में बनी सभी सड़कों की गुणवत्ता जांच हो, जो सड़कें खराब हो चुकी हैं उन्हें तत्काल दुरुस्त किया जाए और जिन अधिकारियों-ठेकेदारों की लापरवाही से जनता को यह पीड़ा झेलनी पड़ रही है, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते जनता को इस धूल-भरी त्रासदी से राहत मिलेगी?

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