मंडला में खुलेआम सट्टा साम्राज्य: काउंटर पर चल रहा खेल, आंखें मूंदे बैठा सिस्टम

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मंडला में खुलेआम सट्टा साम्राज्य
काउंटर लगाकर लिखी जा रही पट्टियां,
सब जान रहे फिर भी खामोश है सिस्टम

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिस जिले को सभी शांत, और आदिवासी संस्कृति और सौहार्द के लिए जाना जाता है, उसी मंडला जिला मुख्यालय में आज अबैध कारोबार तेजी पनप रहे है और यह सब जिम्मेदारो की आपसी साठगांठ या कहे मौन सहमति जो गली गली मोहल्ले मोहल्ला खुलेआम सट्टे का अवैध साम्राज्य खड़ा कर दिया गया है। शायद ख़ाकी का ख़ुफ़िया तंत्र गुम हो गया है या फिर जानकारी के बाद भी शांत बना रहना पसंद कर रहे है हालात ऐसे हैं कि अब सट्टा चोरी-छिपे नहीं, बल्कि काउंटर लगाकर, पट्टियां लिखकर और भीड़ के बीच धड़ल्ले से खिलाया जा रहा है। सवाल यह नहीं है कि सट्टा चल रहा है या नहीं, बल्कि असली सवाल यह है कि जब सबको दिख रहा है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही
सुबह की पहली चाय से देर रात तक अंकों का खेल
शहर के अनेक इलाके सुपर मार्केट राजीव कालोनी इंड्रस्टीज के पीछे देवदरा, लालीपुर, बस स्टैंड, चौरसिया मोहल्ला, रेड क्रॉस के पास, फुहारा क्षेत्र में और सब्जी मंडी जैसे व्यस्त इलाकों में सट्टे का खेल सुबह से शुरू होकर देर रात तक चलता है। सब्जी खरीदने आए लोग, मजदूरी की तलाश में निकले श्रमिक और राह चलते युवा की नजरें सट्टा पट्टियों पर टिक जाती हैं। काउंटर पर बैठा व्यक्ति बेखौफ अंकों की एंट्री करता है, जैसे यह कोई वैध कारोबार संचालित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां न तो पुलिस का डर है और न ही प्रशासन का। यह बेखौफ अंदाज़ खुद में कई सवाल पैदा करता है।
“एक के अस्सी” का लालच और उजड़ते घर
सट्टे का सबसे बड़ा शिकार मजदूर और निम्न मध्यम वर्ग बन रहा है। दिनभर मेहनत कर जो मजदूर मुश्किल से 300–400 रुपये कमाता है, वह “एक के अस्सी” बनाने के सपने में अपनी मेहनत की कमाई दांव पर लगा देता है। नतीजा खाली जेब, घर में झगड़े, कर्ज और टूटते रिश्ते।कई परिवारों के चूल्हे इसी सट्टे की आग में बुझ रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि घर का पैसा सट्टे में उड़ जाने के बाद बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।
नई पीढ़ी को लीलता सट्टा सबसे खतरनाक पहलू यह है कि सट्टे का यह जाल अब नई पीढ़ी तक पूरी तरह फैल चुका है। स्कूल और कॉलेज की उम्र के लड़के खुलेआम सट्टा काउंटर पर देखे जा सकते हैं। मोबाइल और ऑनलाइन माध्यम के साथ-साथ अब फिजिकल काउंटरों ने युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल सट्टा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करने की साजिश जैसा है।
मुख्य खाईबाज का नाम और गहरी जड़ें
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे सट्टा नेटवर्क के पीछे एक बड़ा नाम लगातार सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि सुभाष वार्ड निवासी सुक्कु जैन नामक व्यक्ति लंबे समय से मंडला में सट्टे के इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा है। शहर में यह नाम आम चर्चा का विषय है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि अलग-अलग इलाकों में बैठे सट्टा लिखने वाले लोग सीधे इसी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं और रोजाना लाखों का लेन-देन होता है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि रेवांचल टाइम्स अखबार नही करता है
सिस्टम की चुप्पी या मिलीभगत
सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर है। जब सट्टा काउंटर सब्जी मंडी जैसे सार्वजनिक स्थानों पर लग रहे हों, तो यह मानना मुश्किल है कि इसकी जानकारी किसी को नहीं होगी। क्या यह लापरवाही है या जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं
कई लोगों का आरोप है कि कभी-कभार छोटे स्तर के सट्टा लिखने वालों पर दिखावटी कार्रवाई कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, जबकि असली खाईबाज तक कोई नहीं पहुंचता।
अपराध की जड़ बनता सट्टा
विशेषज्ञों का मानना है कि सट्टा केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह कई अन्य अपराधों की जड़ बनता है। चोरी, मारपीट, घरेलू हिंसा, तक की घटनाओं में सट्टे की भूमिका सामने आती रही है। मंडला में भी अगर समय रहते सख्ती नहीं हुई, तो इसके दुष्परिणाम और भयावह हो सकते हैं।
यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो सवाल सिर्फ सट्टे का नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर उंगली उठेगी। मंडला के लोग पूछ रहे हैं क्या कानून सिर्फ कागजों में है, या फिर जमीन पर भी दिखाई देगा।

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