केंद्रीय बजट पर सियासी तीर भाजपा ने विकास का सेतु बताया, कांग्रेस ने खोखला डिब्बा करार दिया

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मंडला। केंद्र सरकार के वर्ष 2026 के आम बजट ने राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। जहां सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताते हुए सराहा, वहीं विपक्षी कांग्रेस ने इसे जनता की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला निराशाजनक करार दिया। मंडला जिले के प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रियाओं से साफ है कि बजट अब चुनावी मुद्दा बनने की राह पर है। किसानों, युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित प्रावधानों को लेकर दोनों पक्षों में जुबानी जंग तेज हो गई है, जो आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
भाजपा का उत्साह: विकास की रफ्तार, जनकल्याण का मंत्र
भाजपा जिला अध्यक्ष प्रफुल्ल मिश्रा ने बजट को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला मील का पत्थर बताया। उन्होंने धारदार शब्दों में कहा, “यह बजट संतुलित, जनकल्याणकारी और प्रगति की गति देने वाला है। किसानों की समृद्धि, महिलाओं का सशक्तिकरण, युवाओं के लिए रोजगार के द्वार और गरीब-मध्यम वर्ग की मजबूती – हर वर्ग को मजबूत करने का ब्लूप्रिंट है यह।” मिश्रा ने जोर देकर कहा कि कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के लिए भारी-भरकम प्रावधान आने वाले वर्षों में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे, जो भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में अटल कदम है। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का आभार जताते हुए उन्होंने इसे “विकास, विश्वास और भविष्य का बजट” करार दिया, जो आम जनता के सपनों को साकार करेगा।
इसी कड़ी में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) मंत्री संपतिया उईके ने बजट को जनहितैषी और दूरदर्शी ठहराया। उन्होंने प्रभावशाली अंदाज में कहा, “यह बजट समावेशी विकास का प्रतीक है, जो पेयजल, स्वास्थ्य और ग्रामीण अधोसंरचना पर जोर देकर आमजन की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देता है। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में शुद्ध पानी की क्रांति आएगी, जो आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की मजबूत बुनियाद रखेगी।” मंत्री उईके ने महिला सशक्तिकरण, किसानों की आय वृद्धि और युवा रोजगार पर फोकस को सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण बताया। मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने इसे “जनविश्वास और प्रगति का नया आयाम” कहा, जो प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
कांग्रेस का हमला: निराशा का सैलाब, जनता की थाली खाली
दूसरी ओर, बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने बजट पर तीखा प्रहार करते हुए इसे “निराशाजनक और खाली डिब्बा” जैसा ठहराया। उन्होंने धारदार हमले में कहा, “बजट की आवाज तो बड़ी है, लेकिन अंदर कुछ नहीं – शेयर बाजार तक धड़ाम से गिर गया। किसान, महिलाएं, युवा सबके लिए झटका है यह। मनरेगा का नाम बदलकर भूल गए, लेकिन बजट में जिक्र तक नहीं। गांव, गरीब और किसान के लिए जीरो प्रावधान!” पट्टा ने आगे कहा कि महंगाई की मार में टैक्स छूट न देकर सरकार ने “टैक्स-शोषण” किया है। अमीरों को छूटें मिलीं, लेकिन बेरोजगारों की उम्मीदें धराशायी। मध्यम वर्ग ठगा महसूस कर रहा है, जबकि शोषित-वंचित और नीचे धकेले जा रहे हैं। कुल मिलाकर, यह बजट जनभावनाओं के खिलाफ सरकार की विफलताओं का आईना है, जो आक्रोश की आग भड़का रहा है।
जिला कांग्रेस कमेटी मंडला के अध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले ने भी बजट को “निराशाजनक और निंदनीय” करार दिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, सरकार की नीयत का दर्पण है। महंगाई से राहत नदारद, युवा रोजगार पर सन्नाटा, किसानों की लागत पर कोई भरोसा नहीं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा में निवेश की कमी, जबकि एमएसएमई को सिर्फ आश्वासन!” मर्सकोले ने जोर दिया कि यह बजट जनता की जरूरतों से कटा हुआ है, जो प्रचार की जगह पारदर्शी और न्यायपूर्ण नीति की मांग करता है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक दिशा पर सवाल उठाने वाला दस्तावेज ठहराया, जो विपक्ष को जनता की आवाज बुलंद करने का मौका दे रहा है।
इस सियासी घमासान से साफ है कि बजट अब मंडला की सड़कों से संसद तक चर्चा का केंद्र बन गया है। जहां भाजपा इसे विकास की गाड़ी की रफ्तार बताती है, वहीं कांग्रेस इसे जनता की पीड़ा का मजाक मानती है। आगामी दिनों में यह विवाद राजनीतिक रैलियों और चुनावी रणनीतियों को नई धार दे सकता है।

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