ग्राम पंचायत गिठार में पदस्थ सचिव कर रहे जादू अदृश्य बिल लगाकर कर रहे भुगतान

कोरे व धुंधले बिल लगाकर किए जा रहे भुगतान, लाखों के घोटाले की आशंका

रेवांचल टाइम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले मंडला में सरकार की मंशा में पानी फरेने में कोई कसर जिले के जनपद पंचायत से लेकर ग्राम पंचायत तक के जिम्मेदार नहीं छोड़ रहें है जहाँ हितग्राहियों मूलक ग्रामीणों को मिलने वाली मुलभूत सुविधाएं और फर्जी ट्रेडर्स बिना दुकानो के मटेरियल सप्लायर्स के बिल धड़ल्ले से पंचायत दर्पण में स्पष्ट प्रदर्शित होते है, पर न जिला प्रशासन और ना ही जनपद पंचायतों में बैठे जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों को बिल्कुल भी दिखाई नहीं पड़ रहें और सरकार के पंचायत दर्पण में कोरे से लेकर धुंधले बिल जी ना पढ़ने में आते हैं न ही स्पष्ट दिखाई पड़ते है पर ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव और मटेरियल सप्लायर को ही राशि और नग मात्रा समझ सकते हैं और ये सरकारी कर्मचारी ही इनकी भाषा पढ़ सकते है!
वही मंडला आदिवासी जिले में शासन प्रशासन पारदर्शिता बढ़ाने और योजनाओं के सुचारु संचालन के उद्देश्य से सरकार द्वारा पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक सभी विकास एवं हितग्राही मूलक कार्यों की जानकारी एक क्लिक में उपलब्ध कराने हेतु पंचायत दर्पण पोर्टल संचालित किया गया है। इस पोर्टल पर ग्राम पंचायतों द्वारा किए गए निर्माण कार्य, सामग्री की खरीद, मजदूरी भुगतान और योजना-वार व्यय की समस्त जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने का प्रावधान किया गया है, ताकि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण हो सके और आम जनता को यह समझने में आसानी हो कि उनकी पंचायत में वास्तव में कितना कार्य हुआ और उस पर कितना खर्च किया गया।
लेकिन, शासन की इस पारदर्शी व्यवस्था को कुछ अधिकारी कर्मचारी ही पलीता लगा रहे हैं।
वही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत मोहगांव के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गिठार में पिछले पांच वर्षों से पदस्थ पंचायत सचिव सरपंच पर अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। पंचायत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जो भी निर्माण एवं विकास कार्य कराए गए, उनके भुगतान संदिग्ध पाए जा रहे हैं। पंचायत दर्पण पोर्टल पर अपलोड किए गए बिलों में से कई कोरे, धुंधले, अपूर्ण या संशयास्पद नजर आ रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बिलों को मात्र खानापूर्ति के लिए अपलोड किया गया है, ताकि फर्जी भुगतान को वैध ठहराया जा सके।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि ग्राम पंचायत गिठार में सचिव और कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों की मिलीभगत से फर्जी बिल तैयार किए गए हैं, जिन पर न तो स्पष्ट फर्म का नाम दिख रहा है और न ही सामग्री विवरण एवं हस्ताक्षर। कई बिल तो ऐसे हैं जिनका नंबर, दिनांक और राशि तक अस्पष्ट है। कुछ दस्तावेजों में जिस फर्म का उल्लेख किया गया है, वह फर्म अस्तित्व में नहीं है या उस फर्म द्वारा पंचायत को कोई सामग्री उपलब्ध ही नहीं कराई गई। इन तथ्यों से स्पष्ट अंदेशा जताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत में लाखों रुपये के घोटाले की संभावना है।
स्थानीय सूत्र के बताए अनुसार पंचायत क्षेत्र में जितने कार्य दिखाए जाते हैं, उतना कार्य जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। उदाहरण के लिए, निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब पाई जाती है या कई बार सामग्री पहुंची ही नहीं होती, जबकि भुगतान पूरा कर दिया जाता है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से विकास कार्यों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन पंचायत दर्पण में लाखो के भुगतान दर्ज दिखते हैं। यह अंतर ही पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है।
पंचायत दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड में भी कई विसंगतियां सामने आई हैं। कई कार्य ऐसे दर्ज हैं जिनका अता-पता ग्राम में मौजूद नहीं है। यह संदेह इसलिए और गहरा हो जाता है कि सचिव पिछले पांच साल से एक ही पंचायत में पदस्थ है। नियमों के अनुसार, पंचायत सचिव का निरंतर पांच वर्ष तक एक ही ग्राम पंचायत में पदस्थ रहना अनुचित माना जाता है, क्योंकि इससे अनियमितताओं की संभावना बढ़ जाती है। लगातार पदस्थ रहने के कारण सचिव को पंचायत की सभी प्रक्रियाओं पर एकाधिकार प्राप्त हो जाता है, जिसका लाभ उठाकर कई अधिकारी अपने निजी हित साधते हैं।
ग्राम के कुछ जागरूक नागरिकों ने बताया कि इस प्रकार के फर्जी बिल अपलोड कर सचिव ने शासन की योजनाओं में चल रही पारदर्शिता को ध्वस्त कर दिया है। जहां पंचायत दर्पण पोर्टल का उद्देश्य जनता को सशक्त करना और भ्रष्टाचार खत्म करना था, वहीं ग्राम पंचायत गिठार के मामले में यह पोर्टल ही घोटाले को छिपाने का माध्यम बनता नजर आ रहा है। सभी तथ्यों को देखते हुए ग्रामीणों का कहना है कि यदि उच्च-स्तरीय जांच एजेंसी द्वारा इन बिलों की ईमानदारी और विशेषज्ञता से जांच की जाए, तो बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। पंचायत में किए गए भुगतानों की तुलना यदि वास्तविक स्थल निरीक्षण से की जाए, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने कार्य सिर्फ कागजों पर किए गए और कितना धन बिना कार्य किए ही निकाल लिया गया। सचिव और कुछ ठेकेदारों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। फर्जी बिल बनवाना, कोरे बिल अपलोड करना, एक ही फर्म के नाम बार-बार दस्तावेज दिखाकर भुगतान लेना—ये सभी भ्रष्टाचार के स्पष्ट संकेत हैं। नियमों के अनुसार, सभी फर्मों को पंजीकृत होना चाहिए तथा सामग्री आपूर्ति के समय बिल और जीएसटी नंबर स्पष्ट होना अनिवार्य है, लेकिन पंचायत गिठार में ऐसा कुछ दिखाई नहीं देता।
यदि उच्च स्तरीय जांच शुरू हुई, तो संभव है कि केवल ग्राम पंचायत गिठार ही नहीं, बल्कि आसपास की कई पंचायतों में भी इसी प्रकार की अनियमितताएं उजागर हों। इस प्रकार के फर्जी बिलों के कारण ग्रामीण विकास कार्य बाधित होते हैं और सरकारी योजनाओं के प्रति जनता का विश्वास भी कमजोर होता है।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि शासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और ऐसे भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई करेगा, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी कर्मचारी जनता के हित में चल रही योजनाओं में अनियमितता करने का साहस न जुटा सके। पंचायत गिठार का मामला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि पारदर्शिता के बावजूद यदि नियत खराब हो, तो किसी भी व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा सकता है। अब देखने की बात होगी कि क्या प्रशासन इस मामले में ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी कागजों में दबा रह जायगा।
इनका कहना
पांच साल से पदस्थ हूँ बिल मेरे द्वारा लगाए गए है, मेरे पास ओरिजनल बिल की प्रतियां है आपको क्या करना मेरी पंचायत है जैसा बिल लगाना लगाऊँगा जाच होगी तब देखोगे येसी बहुत जचायें देखी हैं हमने ।
डी एस मरकाम
सचिव गिठार जनपद मोहगांव

वही जब इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी मोहगांव से उनका पक्ष जानना चाहा तो तीन बार फोन लगाने पर भी उनके द्वारा कॉल रिसीव नही किया गया।

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