बिछिया जनपद अध्यक्ष के ग्रह ग्राम राता जमके चल रहा है, गड़बड़झाला सी ई ओ के इशारे पर
ग्राम पंचायत राता में शासकीय राशि का बंदरबाट आँख मूंद कर सरकारी धन में लूट

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले की जनपद पंचायत भुआ बिछिया में सरपंच सचिव रोजगार सहायक और सरपँच पति का तालमेल से ग्राम में अंधेर मची हुई है और इस अंधेर गर्दी में जनपद पंचायत के मुखिया मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहायक यंत्री भ्रष्टाचार को बढ़वा देते हुए निर्माण कार्यों में उपयंत्री सरपंच सचिव और रोजगार सहायक को अभयदान दे रहे है और खुला भ्रष्टाचार हो रहा है, वह अब किसी से छुपा नही है जनपद पंचायत के अधीनस्थ संचालित ग्राम पंचायतों में 15 वे वित्त में स्वीकृत निर्माण कार्यों में लूट मची हुई है और उपयंत्री मनोज परते के द्वारा घर बैठे बैठे ही कार्यों के मूल्यांकन किये जाने की जानकारी प्राप्त हो रही और स्वीकृति राशि से भी अधिक मूल्यांकन किया जा रहा है और उपयंत्री के द्वारा बिना कार्य पूर्ण हुए ही पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किये जा रहा है इससे यह प्रतीत होता है कि कान्हा नेशनल पार्क के जंगलों में ये कहावत सही पाई जा रही है कि जंगल मे मोर नाचा पर देखा कौन मतलब यह कि कार्य पूरा हो या न हो बस राशि निकाल कर जेब भर लो और सब को उनका हिस्सा पहुँचा दो फिर देखने वाला कौन हैं।

आज बिछिया जनपद के अंतर्गत आने वाली कान्हा नेशनल पार्क के आसपास की अधिकांश ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं के निर्माण कार्यो में लूट मंचा हुई है और यह सब जनपद पंचायत में बैठें जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों की मौन सहमति से पंचायतो में भ्रस्टाचार अब भस्मासुर का रूप ले चुका हैं।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद अध्यक्ष सकुना उइके के गृह ग्राम राता में 15 वे वित्त से लगभग 6 लाख 68 हजार की राशि स्वीकृत हुई और उस राशि से ग्राम राता में तालाब में सीडी निर्माण और स्नानागार बनना था जिसमे गुणवत्ता पूर्वक कार्य होना था पर लीप पोत कर जैसे तैसे बिना माप दंड के सीडी निर्माण कर दिया गया और स्नानागार बना दिया गया जिसमे टाईल्स लगनी थीं और पुताई होनी थी पर कार्य पूर्ण हुआ ही नही न टाईल्स लगी ही नही और न ही पुताई हुई पर उपयंत्री घर मे बैठ कर अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर कार्य की समीक्षा कर एम बी में पूरा माप भरकर उस कार्य का मूल्यांकन कर सी सी भी जारी कर दी, इसे क्या कहेंगे क्या सरकारी राशि का बंदरबाट नही किया जा रहा है। इसमें बहुत हद तक मुख्य कार्यपालन अधिकारी की भी सहभगिता नजर आ रही है। और बिछिया में अब पंचायतों में सरकारी धन पर लूट की प्रथा चल रही है।
बिछिया की अधिकांश ग्राम पंचायत अपने कारनामों के लिए एक अलग ही पहचान रखती हैं बिछिया जनपद के अधिकारी से लेकर ज्यादातर पंचायतों के कर्मचारी जो कारनामा न करें सो कम है। कभी पंचायतों के प्रतिनिधियों और कभी प्रतिनिधियों के रिश्तेदार शासकीय राशि का दुरुपयोग करते हैं तो कभी पूरी की पूरी शासकीय योजनाओं का बंदरबाट लगाने से पीछे नहीं हटते ऐसा ही एक मामला जनपद बिछिया के अंतर्गत राता पंचायत का सामने आया है जहां पर स्थानीय निवासी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पंद्रहवें वित्त की राशि से निस्तारी तालाब में शासकीय राशि से स्नानागार और सीढ़ी का निर्माण कार्य किया जाना था। निर्माण कार्य के दौरान लोहा जो कि 15 एम.एम का लगना था, फ्लोरिंग 20 एम.एम का डालना था, और कार्य पूर्ण के दौरान टाईल्स लगनी थी।
पर हुआ इसका उलट शासकीय कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक ने आँखें बंद कर निर्माण कार्य में धांधली करते हुए निस्तारित तालाब में स्नानागार और सीढ़ी निर्माण कार्य के लिए 6 लाख 68 हजार( छ: लाख अड़सठ हजार) रुपए पंद्रहवें वित्त की राशि को बंदरबाट लगाने में जरा सी भी चूक नहीं की, अधिकारियों और कर्मचारियों ने न तो लोहा सही लगाया और न ही सही मात्रा में बैश डाली इसके साथ ही फ्लोरिंग भी सही नहीं की गई है। साथ में जो टाईल्स लगनी थी वो भी नहीं लगाई गई।
इसके साथ ही स्टीमेट की राशि से बड़ कर उपयंत्री महोदय ने मूल्यांकन कर दिया, मूल्यांकन कार्य घर बैठे बैठे ही अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लिया। इससे यह सिद्ध होता हैं कि उपयंत्री महोदय ने अपने कमीशन का हिस्सा भी लेने में कही कोई संकोच शायद नहीं किया होगा।
वही जब इस संबध में जनपद पंचायत के मुखिया मुख्य कार्यपालन अधिकारी रमेश मंडावी जी से इस संबध में बात करनी चाही तो उनके मोबाइल नम्बर 9754055911 में रेवांचल की टीम ने लगातार संपर्क किया पर साहब ने मीडिया को कुछ भी बताने से परहेज़ करते नजर आये न उन्होंने अपना मोबाईल अटेन्ड किया और न कोई रिप्लाई दी शायद साहब को मीडिया से बात करने संकोच या फिर परहेज़ है या फिर इसलिए बात नही करते कि मीडिया के सामने कहि सच्चाई न आ जाये यही हाल जनपद में पदस्थ सहायक यंत्री महोदय का उन से भी रेवांचल की टीम संपर्क किया पर वह भी अपना मोबाईल रिसिव नही किया इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जब जिम्मेदार अधिकारी मीडिया से दूरी क्यों बना रहे है तो कही न कही गडबड़ी तो चल रही हैं और उन्हें अच्छे से ये जानकारी है और जब मीडिया को पता चलता है उसे अब क्या जबाब दे यह सोच कर अधिकारी अपना मोबाइल नही उठाते हैं पर आखिर कब तक पर जनता और मीडिया ये जनाना चाहती है कि जो सरकार लोगों के लिये मुलभूत सुविधाएं के लिए राशि दे रही और उसमें निगरानी के आपको गाड़ी ऑफिस महीना को अच्छी खासी मोटी तनख्वाह भी दे रही जिससे आप जनता के साथ अन्याय न हो उनकी सुने और गलत कार्यो पर रोक लगाए उन्हें दंडित करे और जो आपसे मीले जो जानकारी मांगे उन्हें प्रदाय करे पर ये छिप रहे है आखिर क्यों?