घरेलू गैस सिलेंडरों का हो रहा खुलेआम दुरुपयोग

होटल और चाय दुकानों में व्यावसायिक रूप से हो रहा इस्तेमाल,

रेवांचल टाइम्स – मंडला, नगर से लेकर विकास खंडों में गैस संचालकों के द्वारा शासन से तय रेट अधिक राशि लोगो से वसूल रहे है उन्हें जब पता चला है जब उनके मोबाईल में मेसेज आते है कि तय दर से अधिक राशि ले ली गई पर लोग इस लिए भी शांत रहते है कि गैस संचालक के द्वारा घर पर पहुँचा कर दिया गया हैं जबकि नियम यह है।
वही दूसरी तरफ घरेलू उपयोग के लिए सब्सिडी के तहत दिए जाने वाले एलपीजी गैस सिलेंडरों का दुरुपयोग अब आम होता जा रहा है। सरकार जिन उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर यह सिलेंडर देती है, उन्हीं सिलेंडरों का प्रयोग अब बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा रहा है। होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट और चाय की दुकानों में खुलेआम घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल
किया जा रहा है, एल पी जी सिलेंडर पर उसके खाली होने का वजन लिखा होता है यह 15 से लेकर 17 किलो बीच होता है घरेलू गैस सिलेंडर में 14.200 किलो गैस होती है खाली सिलेंडर 16 किलो का है तो गैस सहित उसका वजन लगभग 30.200 का होना चाहिए इसको लेकर उपभोक्ताओं का ध्यान नही रहता जब गैस सिलेंडर कम समय मे खाली हो जाता है तब उपभोक्ता को कम गैस होने की शिकायत होती है तब उपभोक्ताअपने आप को ठगा सा महसूस करता है

निर्धारित कीमत से ज्यादा वसूल रहे लोगों से

वही जानकारी के अनुसार गैस कम्पनी के द्वारा घर घर सिलेंडर डिलिवरी करने वाला कर्मचारी निर्धारित रेट के ऊपर बीस से तीस रुपये अधिक राशि वसूली की जाती है जो न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पारदर्शिता के लिहाज़ से भी गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।प्रशासन की अनदेखी से गैस एजेंसी के डिलीवरी वाहनों में सुरक्षा नियमों की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है कुछ एजेंटों की मिली भगत से इनका गैरकानूनी तरीके से जुगाड़ कर लेते हैं। यही नहीं, कई उपभोक्ता भी सब्सिडी वाले सिलेंडर बेचकर पैसा कमाने में लगे हुए हैं, जिससे वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध नहीं हो पाती।

वितरण में गड़बड़ी, बिना नाप-तोल और सुरक्षा जांच के सिलेंडर सप्लाई

खबर यह भी है कि गैस वितरक उपभोक्ताओं को बिना वजन जांचे और सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना सिलेंडर पहुंचा रहे हैं। कुछ मामलों में सिलेंडर का वजन तय मात्रा से कम होता है इसके अलावा कई बार सिलेंडरों की सुरक्षा सील भी टूटी हुई मिली है, जो संभावित विस्फोट जैसी दुर्घटनाओं को आमंत्रित करती है।

सरकारी खजाने पर बोझ, प्रशासन की चुप्पी

सरकार की मंशा थी कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ती दरों पर रसोई गैस उपलब्ध कराई जाए, लेकिन अब यह योजना अपने लक्ष्य से भटकती नजर आ रही है। सब्सिडी पर दिए जाने वाले सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग से सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये की हानि हो रही है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और गैस एजेंसियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मामले की शिकायत कई बार की जा चुकी है, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या संस्था इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रही है। ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट है कि कहीं न कहीं अधिकारियों और गैस एजेंसियों की मिलीभगत भी इस गोरखधंधे को बढ़ावा दे रही है।
जरूरत है सख्त निगरानी और कार्रवाई की
जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह ना केवल सरकार की नीतियों को कमजोर करेगा, बल्कि आम जनता की जान को भी खतरे में डाल सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह नियमित निरीक्षण करे, संदिग्ध दुकानों पर छापेमारी करे, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही, आम नागरिकों को भी जागरूक होना होगा कि वे अपने अधिकारों की रक्षा करें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।

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