सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: शासकीय कर्मचारियों को ACR की हर ग्रेडिंग बताना अनिवार्य
‘Good’ या ‘Outstanding’ भी हो सकती है करियर पर असर डालने वाली – पदोन्नति से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने Dev Dutt बनाम भारत संघ प्रकरण में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि शासकीय कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में दी गई हर प्रकार की ग्रेडिंग – चाहे वह Very Good, Good, Average, Poor या फिर Outstanding ही क्यों न हो – संबंधित कर्मचारी को अनिवार्य रूप से सूचित की जानी चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह तय करने का मापदंड कि कोई प्रविष्टि प्रतिकूल (Adverse) है या नहीं, उसकी शब्दावली नहीं बल्कि उसका कर्मचारी के करियर पर वास्तविक प्रभाव है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कई बार “Good” जैसी प्रविष्टि भी पदोन्नति के संदर्भ में प्रतिकूल सिद्ध हो सकती है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी को “Outstanding” प्रविष्टि दी जाती है, तो उसे भी बताया जाना चाहिए, क्योंकि इससे कर्मचारी का मनोबल बढ़ता है और वह और अधिक समर्पण से कार्य करता है।
फैसले में यह निर्देश भी दिए गए कि ACR की ग्रेडिंग उचित समयावधि के भीतर कर्मचारी को सूचित की जाए, ताकि उसे सुधार अथवा प्रतिनिधित्व (Representation) का अवसर मिल सके। कर्मचारी द्वारा किए गए प्रतिनिधित्व पर निर्णय प्रविष्टि लिखने वाले अधिकारी से वरिष्ठ अधिकारी द्वारा निष्पक्षता एवं समयबद्धता के साथ किया जाना आवश्यक है।
उक्त प्रकरण में न्यायालय ने अपीलकर्ता की गोपनीय रिपोर्ट में की गई प्रविष्टि के विरुद्ध उसे सुनवाई का अवसर देने के बाद उसकी पदोन्नति पर पुनः विचार करने का निर्देश दिया। साथ ही, यदि अपीलकर्ता को पात्र पाया जाता है तो उसे बकाया वेतन, उच्च पेंशन तथा 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के आदेश भी दिए गए।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय कर्मचारी की पदोन्नति एवं क्रमोन्नति के लिए सामान्यतः पिछले पांच वर्षों की ACR देखी जाती है। यदि अधिकारी की पांच वर्षों की ACR ‘A’ श्रेणी की है तो उसे पदोन्नति का लाभ दिया जाना चाहिए, जबकि द्वितीय श्रेणी के पदों पर मेरिट की तुलना में वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जाती है।
यह निर्णय बाद में Abhijit Ghosh Dastidar बनाम भारत संघ (2009) तथा Sukhdev Singh बनाम भारत संघ (2013) जैसे मामलों में भी पूर्ण पीठ द्वारा अपनाया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्राकृतिक न्याय, पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रशासन की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिससे देशभर के लाखों शासकीय कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
एडवोकेट गोपाल सिंह बघेल
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