त्योहारी बाजार में उमड़ी भीड़, सड़कों पर रेंगता यातायात बबलिया साप्ताहिक बाजार बना जाम का अड्डा
रेवांचल टाइम्स निवास मंडला होली पर्व नजदीक आते ही ग्रामीण अंचलों की साप्ताहिक बाजारों में भीड़ बेकाबू होती जा रही है। त्योहार की खरीदारी के लिए उमड़ रही भीड़ ने जहां बाजारों की रौनक बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्था और लापरवाही ने आमजन की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। निवास क्षेत्र के बबलिया साप्ताहिक बाजार का हाल इन दिनों चिंताजनक बना हुआ है। दुकानों की मनमानी साज-सज्जा और सड़क पर कब्जा जमाए ठेले-खोमचे वालों के कारण मुख्य मार्ग पर जाम लग रहा है।
बबलिया बाजार में दोपहर से ही खरीददारों की भीड़ देखी गई। रंग, गुलाल, पिचकारी, कपड़े, मिठाई और घरेलू सामान की दुकानों पर लोगों का तांता लगा रहा। लेकिन इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई। सड़क के दोनों किनारों पर अस्थायी दुकानें इस तरह सजी हैं कि पैदल चलने तक की जगह मुश्किल से बची है। हालत यह है कि दोपहिया वाहन भी बड़ी मुश्किल से निकल पा रहे हैं, जबकि चारपहिया वाहन चालकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार ठेकेदार द्वारा दुकानों का नियमन सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। निर्धारित सीमा से बाहर तक दुकानें फैल गई हैं। कई दुकानदारों ने मुख्य सड़क तक अपना सामान सजा रखा है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो रहा है। ठेले वालों ने तो मानो सड़क को ही अपनी स्थायी जगह बना लिया है। फल, सब्जी और फास्ट फूड के ठेले मुख्य मार्ग के बीचोंबीच खड़े हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इतनी भीड़ के बावजूद सुरक्षा के नाम पर कोई विशेष व्यवस्था नहीं दिखी। न तो पुलिस बल की मौजूदगी नजर आई और न ही ग्राम पंचायत की ओर से भीड़ नियंत्रण के उपाय किए गए। यदि इस भीड़भाड़ में कोई अनहोनी घटना घट जाए तो उससे निपटने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग या आपातकालीन योजना दिखाई नहीं देती। अग्निशमन वाहन या एंबुलेंस को प्रवेश करना भी मुश्किल हो सकता है।
बाजार में खरीदारी करने आए ग्रामीणों ने प्रशासन की लापरवाही पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि हर वर्ष त्योहारों के समय यही स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन सबक नहीं लेता। “त्योहार में खरीदारी करना मजबूरी है, लेकिन जाम और अव्यवस्था के कारण आधा समय तो रास्ते में ही निकल जाता है, वहीं एक दुकानदार ने बताया कि यदि बाजार की रूपरेखा तय कर दुकानों को व्यवस्थित ढंग से लगाया जाए तो समस्या काफी हद तक सुलझ सकती है।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि बाजार क्षेत्र में अस्थायी पार्किंग स्थल की व्यवस्था नहीं होने से लोग सड़क पर ही वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे जाम और भी विकराल हो जाता है।
ग्राम पंचायत और स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बाजार से ठेका शुल्क वसूला जाता है, लेकिन बदले में सुविधाएं और सुरक्षा नदारद हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भयावह हो सकती है। प्रशासन को चाहिए कि बाजार क्षेत्र में स्पष्ट सीमांकन करे, सड़क के बीच से ठेले हटाए, अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था करे और भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल तैनात करे।
त्योहारी उत्साह के बीच यदि व्यवस्था चरमराए तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। बबलिया साप्ताहिक बाजार की वर्तमान स्थिति प्रशासन के लिए चेतावनी है। होली जैसे बड़े पर्व से पहले यदि ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो जाम, अव्यवस्था और संभावित दुर्घटनाएं कभी भी गंभीर रूप ले सकती हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और त्योहार की खुशियों को अव्यवस्था की भेंट चढ़ने से बचाते हैं।