ठेकेदार–अफसर गठजोड़ से छात्रावासों में भ्रष्टाचार की बू, लाखों का खेल बेनकाब
छात्रावासों में हुई घटिया खरीदी में जम के कर हुआ भ्रष्टाचार, ठेकेदार से विभाग की साठगांठ की आ रही भू
छात्रावासों में लाखो की साम्रगी खरीदी में गड़बड़झाला
बिना सत्यापन के भुगतान करने की तैयारी, जैम पोर्टल से जिला शिक्षा केन्द्र ने किया क्रय
रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिला में भ्रष्टाचार रिश्वत और कमीशन बाजी आज आम हो चली है और यह प्रथा सरकारी कार्यालयों में एक परंपरा चल रही है जहाँ पर आज हर सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत कमीशन के कोई कार्य नही होते दिखाई पड़ रहे है आम जनता का बुरा हाल है और आज शिक्षा व्यवस्था भी चौपट हो चुकी है जहाँ पर बच्चों के स्कूल सहित छात्रावासों में खरीदी सामग्रियों में खुला कमीशन का खेल चल रहा हैं, जहाँ ठेकेदारों के द्वारा विभाग और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से सामंजस्य बिठाकर उनको उनका हिस्सा समय पर देकर स्कूलों और छात्रावासों में घटिया और गुणवत्ता हीन सामग्री पहुँचा कर आनाब शनाब बिल लगाकर शासकीय राशि मे भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा केन्द्र मंडला समग्र शिक्षा अभियान के सोलह छात्रावास के संचालन में जमकर मनमानी की जा रही है। छात्रावास में वार्डन से रूपए लेनदेन की शिकायते पहले भी हो चुकी है लेकिन अब इन्ही छात्रावासो में साम्रगी क्रय करने में गड़बड़झाला किया जा रहा है। जैम पोर्टल से लाखो रूपए की साम्रगी क्रय कर छात्रावासो को सप्लाई कर दिया गया है। आरोप है कि ताकिया गद्दा रोटी मेकर से लेकर वांशिग मशीन को शासन की तय गाइड लाइन से क्रय नहीं किया गया है। यहां गद्दा हल्के व पिचकने वाले छात्राओ को दिए गए है। इसके अलावा वाशिंग मशीन की क्षमता कम होने पर उसे दबाब में बदला गया है और लाखो रूपए का रोटी मेकर कोई काम का नहीं है। ये साम्रगी क्रय करने के बाद जिला शिक्षा केन्द्र के डीपीसी के द्वारा बिना सत्यापन कराए बिल भुगतान कराने की तैयारी कर रहे है।
बताया गया है कि आदिवासी बाहुल्य जिले मंडला में बालिकाओ के लिए अकादमिक संसाधन के साथ गुणवत्तायुक्त शिक्षा से जोडऩे के लिए शासन स्तर से कई कार्यक्रम चलाए जा रहे है। यहां वनांचल में बालिकाओ को शिक्षा से जोडऩे के लिए छात्रावास संचालित किए जा रहे है यहां रहकर बालिकाए उच्च शिक्षा ग्रहण कर सके लेकिन जिन जिम्मेदारो के छात्रावासो के कियान्वयन और प्रबंधन सौंपा गया। वे ही बालिकाओ के हक पर डाका डाल रहे है। छात्रावासो में बालिकाओ के भोजन से लेकर तेल साबुन व अन्य साम्रगी में कटौत्री कर वार्डन के मार्फत अपनी जेबें भरे जा रही है। इतना ही नहीं पांच साल में एक बार छात्रावासो में बालिकाओ के बेड पर नए गद्दा ताकिया के साथ कपड़े धुलने के लिए वाङ्क्षशग मशीन और जल्द व समय पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए रोटी मेकर क्रय किया गया। लाखो रूपए की सामग्री के क्रय करने में भी जमकर गड़बड़झाला किया गया है। इन साम्रगी के भौतिक सत्यापन करने के दौरान समिति सदस्यो के द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई है लेकिन राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्देशो का कही कोई पालन नहीं किया जा रहा है।
हल्के किस्म के गद्दे ताकिया
बताया गया है कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले में सोलह छात्रावास है। इनमें करीब 1890 बालिकाएं व बालक के नाम दर्ज है। इनमें बालिकाओ की संख्या अधिक है। हाल में ही छात्रावासो में जो गद्दे व ताकिया सप्लाई किए गए है उनकी क्वालिटी बहुत ही निम्म है। गद्दे में राखी की फोम भरी हुई है। जो कुछ दिनो के बाद पिचक जाएगी। सोने पर ये गद्दे बालिकाओ के लिए परेशानी की वजह बनेगें। यहां तक ताकिया के हाल इससे ही अधिक बुरे है। वॉशिंग मशीन को बदला गया।
ठेकेदार बना रहा भुगतान के लिए दवाब जिला प्रशासन के मुखिया कर रहे कॉल
वही बताया गया है कि छात्रावासो में क्रय कि गईं सामग्रियों में विभागीय साठगांठ तो तो ठीक है पर इस मामले में हुए भ्रष्टाचार को लेकर ठेकेदार को भुगतान को लेकर मंडला जिले के जिला प्रशासन के मुखिया तक कॉल कर रहे है वही क्रय की गई सामग्री में भौतिक सत्यापन के बिना ही ठेकेदार जो कि छात्रावासो में भेजें गए गुणवत्ता विहीन सामग्रियों की राशि पाने किसी भी हद तक जा रहें है और अपना पैसे का रौव दिखा कर जिले के डी पी सी पर भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है और वही नाम न छपाने की शर्त पर बताया गया कि जो सामग्री छात्रावासो में ठेकेदार के द्वारा भिजवाया गया है वह घटिया और अधिक मुल्यों की भेजी गई जिसमें कुछ जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन के मुखिया तक ठेकेदार को भुगतान करने फ़ोन पर कहा जा रहा हैं इससे साफ है कि आज किस हद तक कि रिश्वत ख़ोरी कमीशन बाजी और जिम्मेदार अपने कमीशन के लिए की हद तक गिर रहे है जो कि छात्रावासो में अध्ययन रत बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में घात लगा कर कमीशन में सेंध मारी की जा रही हैं
रोटी मेकर बनी शोपीस
वही जिले के छात्रावासों में कोई ये पहली बार खरीदी में भ्रष्टाचार या कमीशन बाजी का खेल नही हुआ है ये पुरानी परंपरा है जो इस जिले के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अमला निभाता चला आरहा है खबरें छपती है शिकायत होती है पर जिनको कमीशन जाना है वह जाऐगा जहा भ्रष्टाचार करना है वह करेगे इन्हें कौन है रोकने वाला जो रोक सकेगा वही पहली बार रोटी मेकर मशीन क्रय की गई। सोलह रोटी मेकर को करीब 2.50 लाख प्रति के हिसाब से छात्रावास में पहुंचाई गई लेकिन रोटी मेकर चालू करने के लिए इन छात्रावासो में इलेक्ट्रानिक लोड ही नहीं है। कुछेक छात्रावास में लोड मिल भी जाता है तो रोटी मेकर को ऑपरेट कर पाना रसोईयो के बस में नहीं है। रसोईयो को रोटी संचालित करने के लिए कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया और विद्युत क्षमता बढ़ाई गई है। इसके चलते रोटी मेकर शोपीस बन कर खराब होना तय है।
इतनी राशि का होना भुगतान
बताया गया है कि 1890 बालिकाओ के बेड पर गद्दा व ताकिया प्रति बालक बालिकाओ को तीन हजार रूपए के हिसाब 5670,000, वाशिंग मशीन 16 नग बीस हजार के हिसाब 320,000 और रोटी मेकर 16 प्रति 250,000 से 40 लाख रूपए की है। करीब 99 लाख 90 हजार रूपए का भुगतान किया जाना है। भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट नहीं मिली है लेकिन जिले के उच्च अधिकारी के द्वारा स्थानीय ठेकेदार व सप्लायर को भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है।
इनका कहना है
साम्रगी क्रय करने के लिए राज्य शासन के निर्देशो का पालन किया गया। गद्दा व ताकिया खराब निकलते है तो हम वापिस कर देंगे। या फिर सप्लायर की ईएमडी राशि राजसात हो जाएगी। रोटी मेकर के लिए छात्रावास में बिजली लोड बढ़ाएगें। इसके लिए छात्रावास से व्यवस्था बनाई जाएगी।
एके विश्वकर्मा
डीपीसी, जिला शिक्षा केन्द्र मंडला